इसका संयोजक पूर्व कुलपति प्रो. गंगाधर पंडा को बनाया गया है। इतिहास में यह पहली बार हुआ है। संस्कृत के प्रचार-प्रसार एवं सहयोग के लिए विश्वविद्यालय और संस्था के बीच संधि पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है। यह अनुबंध तीन वर्षों के लिए किया गया है।
कुलपति और संस्था के जनरल सेक्रेटरी स्वामी पद्मनाभा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। जल्द ही बैठक कर छात्रों के चयन की सूची पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। संयोजक प्रो. गंगाधर पंडा ने बताया कि दिव्य जीवन संस्था देश में संस्कृत, संस्कृति एवं संस्कार के उत्थान के लिए कार्य करती है। छात्रों का चयन उनकी प्रतिभा और आर्थिक स्थिति के आधार पर किया जाएगा। यह छात्रवृत्ति छात्रों में प्रतियोगिता का भाव और प्रेरणा का भाव पैदा करेगी।