कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के नवागत कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि संस्कृत को तकनीकी व अंग्रेजी से जोड़ने की जरूरत है। इस दिशा में प्रयास किया जाएगा ताकि संस्कृत के विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
बतौर 33 वें कुलपति के रूप में उन्होंने गुरुवार को वैदिक मंत्रों के बीच विश्वविद्यालय में अपना कार्यभार ग्रहण किया। कहा कि विश्वविद्यालय में कुछ नए पाठ्यक्रम शुरू होंगे। इसके अलावा अंग्रेजी और कंप्यूटर की अनिवार्यता के लिए भी प्रयास किया जाएगा।
फिलहाल उनकी पहली प्राथमिकता विश्वविद्यालय में पाठन-पाठन का माहौल और बेहतर व अनुशासन को बनाना है। कहा कि शिक्षकों व कर्मचारियों के सहयोग से प्राच्य विद्या को विश्व फलक पर पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय दुनिया की प्राचीनतम प्राच्य विद्या का केंद्र है। ऐसे में संस्था को केंद्रीय दर्जा दिलाने का प्रयास नए सिरे से किया जाएगा।
प्रो. शुक्ल बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने के बाद सुबह करीब 10.50 बजे विश्वविद्यालय पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने परिसर स्थित वाग्देवी मंदिर में दर्शन पूजन किया।
मां सरस्वती देवी, डॉ. संपूर्णानंद की मूर्ति पर माल्यार्पण कर नमन किया। सुबह 11.10 बजे केंद्रीय कार्यालय में निर्वतमान कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे से कुलपति पद का कार्यभार लिया । कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी ने उन्हें पदभार ग्रहण कराया।