वाराणसी। संकटमोचन संगीत समारोह की अंतिम निशा हर किसी के लिए यादगार बन गई। श्रोता हों, कलाकार हों या आयोजक हर मायने में 97वां डिजिटल संगीत समारोह तो हर किसी के लिए अविस्मरणीय बन गया। पद्मश्री अनूप जलोटा, शिवमणि, यू राजेश और पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने देर रात समारोह में हाजिरी लगाकर इसमेें चार चांद लगा दिए।
शनिवार की देर रात पद्मश्री अनूप जलोटा ने कोरोना के संकट से जूझ रहे लोगों को शक्ति देने की हनुमान जी से विनती करते हुए उन्होंने कई भजन प्रस्तुत किए। उन्होंने सबसे पहले जो तू मिटाना चाहे जीवन की तृष्णा, सुबह शाम बोल बंदे कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा...। इसके बाद राम नाम अति मीठा है, कोई गाकर देख ले... गाया। इसके पहले शिवमणि केड्रम का जादू और यू राजेश के मेनडोलीन की युगलबंदी श्रोताओं के सिर चढ़कर बोली। चेन्नई से जुड़े शिवमणि ने एक दर्जन से ज्यादा वाद्ययंत्रों से कला की साधना संकटमोचन को अर्पित की। बांसुरी वादक पं. हरि प्रसाद चौरसिया ने मुंबई से जुड़े। उनके शिष्य विवेक सोनार ने बांसुरी वादन से राग चंद्रकौंस की अवतारणा की। मुंबई से संतूर वादक पद्मश्री पंडित सतीश व्यास ने राग चारुकेशी की अवतारणा की। मेवाती घराने के पंडित सुमन घोष अमेरिका के ह्यूस्टन से जुड़े। उन्होंने राग श्री सुनाने के साथ ही गुरु पंडित जसराज की रचना हनुमान लला मेरे प्यारे लला...गाकर संकटमोचन की आराधना की। चेन्नई से ऊर्जावान मृदंगम वादक कलाकार पंडित पटरी सतीश जुड़े और मृदंगम वादन की प्रस्तुति दी। जयपुर से विख्यात सारंगी वादक कलाकार पद्मश्री उस्ताद मोइनुद्दीन खां ने अपने बेटे मोमिन खां के साथ राग शिवरंजनी में प्रस्तुति दी। आगरा एवं जयपुर घराने के शौनक अभिषेकी ने पुणे से किरवानी में हनुमान स्तोत्रम की प्रस्तुति दी।
अगली प्रस्तुति रही सारेगामापा से लोकप्रियता पाने वाले कलाकार मोहम्मद अमान की। वह जयपुर से डिजिटल मंच पर विराजमान हुए। इसके बाद बनारस घराने के वरिष्ठ तबला वादक पं. अनोंदो गोपाल बंदोपाध्याय पुत्र प्राण गोपाल बंदोपाध्याय के साथ जुड़े। इसी क्रम में नई दिल्ली से लोकेश आनंद ने शहनाई वादन किया। कोलकाता से सरोदवादक पं. देवाशीष भट्टाचार्या नेप्रस्तुति दी। अंत में उस्ताद शुजात खां ने शुभकामनाएं दीं। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।