डीसीपी ने बताया कि एसीपी पिंडरा प्रतीक कुमार और फूलपुर, बड़ागांव की विशेष टीम ने हर पहलुओं की जांच की। समीर, घायल रामू का आपस में कोई संबंध नहीं था। ऐसे में दोनों को गोली मारने की कड़ी नहीं जुड़ रही थी। घायल भी आरोपियों को पहचान नहीं सका था। गांव में बाहरियों की मौजदूगी क्यों थी, इसकी स्थिति भी तय नहीं हो पा रही थी। गिरोह बाजी के एंगल पर जांच शुरू की गई। सीसी कैमरों की मदद ली गई। ग्राम पंचायतों की ओर से लगाए कैमरे सोलर वाले थे। वारदात से चार दिन पहले से धूप नहीं थी। जिसकी वजह से कैमरे बंद थे। वारदात का कोई कारण सामने नहीं आ रहा था। इसके बाद अन्य 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस खंगाले गए। सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहा था। इसी दौरान घटनास्थल से कुछ दूर एक घर के निजी कैमरे में एक रिकॉर्डिंग मिली, वीडियो स्पष्ट नहीं था, लेकिन ऑडियो में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले। जिसके आधार पर कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के नाम सामने आए।
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इन पांच आरोपियों की गिरफ्तारी को दबिश
चौबेपुर के पलकहा निवासी दीपक यादव, उगापुर धौरहरा निवासी संदीप यादव, मनीष यादव, बड़ागांव के चकखरावन निवासी पवन कुमार पाल और रोहनिया थाना क्षेत्र के एसएमएस स्कूल के पीछे रहने वाले आकाश पाल की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। संदीप पर हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर समेत 10 प्राथमिकी दर्ज हैं। दीपक पर भी कई मामले हैं। गिरफ्तारी टीम को पुलिस आयुक्त ने 25 हजार इनाम की घोषणा की है।