अघोरेश्वर भगवान राम की 89वीं जयंती समारोह में गुरुपद संभव राम ने कहा कि आज का समाज चकाचौंध से दिग्भ्रमित हो रहा है। पहले भी समस्याएं आने-जाने की थीं, रहने-करने की थीं, लेकिन वह हमें जीवन जीने की प्रेरणा देती थीं, उत्साहित करती थीं कि हम आगे बढें, मेहनत करें।
अघोरेश्वर हमेशा हमारे साथ हैं। जैसा हम बोलते हैं, करना चाहते हैं, वह सुनते हैं। लेकिन, यह हमारा दुर्भाग्य है कि हम उनका अनुसरण नहीं करते। ये बातें बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम ने शनिवार को कहीं। वह पड़ाव स्थित श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम में अघोरेश्वर भगवान राम की 89वीं जयंती समारोह पर प्रवचन कर रहे थे।
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गुरुपद संभव राम ने कहा कि जो चकाचौंध हम देख रहे हैं, इससे आज का समाज दिग्भ्रमित होता जा रहा है। पहले भी समस्याएं आने-जाने की थीं, रहने-करने की थीं, लेकिन वह हमें जीवन जीने की प्रेरणा देती थीं, उत्साहित करती थीं कि हम आगे बढें, मेहनत करें। वह हमारे आत्मबल को मजबूत करती थीं। आज जितनी आसानी से हमें चीजें उपलब्ध हो जा रही हैं, हम उतने ही कमजोर होते जा रहे हैं। अध्यक्षता डॉ. विजय प्रताप सिंह ने की। मुख्य अतिथि यूपी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह रहे। संचालन डॉ. बामदेव पांडेय और धन्यवाद हरिहर यादव ने किया। गोष्ठी में अवधूत भगवान राम नर्सरी विद्यालय के मेधावियों को मेडल दिया गया। श्री गुरुपद वाणी पुस्तक का लोकार्पण किया गया।
इससे पहले सुबह 5:30 बजे प्रभातफेरी निकाली गई। श्रद्धालु अघोरेश्वर महाविभूति स्थल पहुंचे। कलश में गंगाजल लिया और पड़ाव आश्रम वापस आए। भक्तों ने आश्रम परिसर में श्रमदान किया। सुबह आठ बजे औघड़ गुरुपद संभव राम ने अघोरेश्वर महाप्रभु के चिरकालिक आसन का पूजन किया। पृथ्वी पाल ने सफलयोनि का पाठ किया। श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर अघोरेश्वर महाप्रभु की चरण-पादुका पर पुष्पांजलि अर्पित की।