काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के विरोध में रविवार को ललिता घाट पर सर्वदलीय धरना दिया गया। सभी दलों के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि काशी की पहचान यहां के मंदिरों और गलियों से है। केंद्र सरकार काशी की मूल पहचान और संस्कृति को नष्ट कर रही है। धरने से पहले चितरंजन पार्क से जुलूस की शक्ल में सभी दलों के कार्यकर्ता ललिता घाट पहुंचे। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
इसकी अगुवाई कांग्रेस के पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, अपना दल की प्रदेश अध्यक्ष पल्लवी पटेल और सपा के पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल ने की। कॉरिडोर के विरोध से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां लिए कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
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कांग्रेस के पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र ने कहा कि हिंदू हितों के नाम पर बनी भाजपा सरकार काशी में हिंदू मंदिरों को तोड़ रही है। सपा के पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल ने कहा कि भाजपा का जो हाल राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुआ है, वैसा ही हाल 2019 लोकसभा चुनाव में होगा।
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आप नेता संजय सिंह ने कहा कि भाजपा एक तरफ अयोध्या में राम मंदिर बनाना का नारा देती है। दूसरी तरफ काशी में मंदिरों को तोड़ रही है। यहां सैकड़ों प्राचीन मंदिर तुड़वाए गए हैं। प्राइवेट मेंबर बिल के जरिए इसे वह राज्यसभा में उठाएंगे। अपना दल की प्रदेश अध्यक्ष पल्लवी पटेल ने कहा कि कॉरिडोर से काशीवासियों का नुकसान हो रहा है।
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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का आरोप है कि राफेल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के साथ केंद्र सरकार मजाक कर रही है। सिंह ने कहा-केंद्र सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि हमने इज लिखा था आपने हैज बीन पढ़ लिया, हमने इज लिखा था आपने वाज पढ़ लिया, हमने तो वर्जन लिखा था आपने पोर्शन पढ़ लिया।
रविवार को ललिता घाट पर धरने के दौरान पत्रकारों से बातचीत में राफेल मामले में याचिकाकर्ता सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस हैं, तीन जजों की पीठ है। सरकार कहना चाहती है कि उन्हें अंग्रेजी पढ़ना और ग्रामर समझ नहीं आता। मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे। संसद की अवमानना का मामला भी उठाएंगे।