सलेमपुर लोकसभा सीट से सिर्फ भाजपा का ही नहीं सांसद रविंद्र कुशवाहा का भी हैट्रिक चांस था। उनके रास्ते का रोड़ा सपा के रमाशंकर राजभर बने हुए थे। रमाशंकर एक बार पहले रविंद्र के पिता हरिकेवल प्रसाद को हारकर संसद का सफर कर चुके थे। हालांकि उस बार वो बसपा के सारथी थे। भाजपा इतिहास बनाने की बात कह रही है, जोकी पूरी नहीं हो पाई।
पिता की राजनीतिक विरासत संभाल रहे 61 वर्षीय रविन्द्र कुशवाहा 2014 में पहली बार इस सीट पर कमल खिलाने में कामयाब हुए थे। उन्होंने बसपा के रविशंकर सिंह पप्पू को 2,32, 342 मतों के अंतर से हराया था।
2019 में भी पार्टी ने रविन्द्र कुशवाहा पर भरोसा जताया। सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी और बसपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा भी भाजपा के विजयरथ को नहीं रोक सके थे। रविंद्र ने उन्हें करीब 1,12,477 मतों से शिकस्त दी थी। इस बार रविंद्र तीसरी बार मैदान में थे। इस सीट से कांग्रेस से विश्वनाथ पाण्डेय, रामनगीना मिश्र, जनता दल से हरिकेवल, भाजपा से रविंद्र कुशवाहा लगातार दो-दो लोकसभा चुनाव में जीत चुके हैं। हरिकेवल प्रसाद ने यहां से चार चुनाव जीते, लेकिन लगातार नहीं। रमाशंकर राजभर 2009 में हरिकेवल प्रसाद को हराकर सांसद बने थे।
अब तक सिर्फ कांग्रेस ने ही लगाई है हैट्रिक
सलेमपुर सीट से अब तक सिर्फ कांग्रेस ही हैट्रिक लगा पाई है। कांग्रेस ने यहां 1957 में अस्तित्व में आई इस सीट पर 1971 तक लगातार चार चुनाव जीते। इसमें 1957 में विश्वनाथ राय, 1962 में विश्वनाथ पाण्डेय, 1967 में भी विश्वनाथ पाण्डेय और 1971 में तारकेश्वर पाण्डेय चुनाव जीते थे। इसके बाद कोई दल हैट्रिक नहीं लगा पाया।