अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संविधान को बंधक बनाने, कोर्ट को धमकी देने के रवैये से बाज आए मुस्लिम समाज। आपको जो कहना है कोर्ट कहें। शुक्रवार को आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयान के बाद संत समाज की बैठक में एक स्वर से कहा गया कि यह देश संविधान से चलेगा शरिया से नहीं।
महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि श्री राम जन्म भूमि किसी के कृपा से नहीं मिली है। हमने संविधान से और कोर्ट से प्राप्त किया है। कृष्ण जन्मभूमि और श्री काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी भी हम कोर्ट से ही प्राप्त करेंगे। हमारी आस्था संविधान में है और रही बात यह कि कोर्ट और प्रशासन हमारा साथ दे रहा है तो 2014 से पहले यही आरोप तो आप पर भी लगाए जा सकते थे। हमने तो यह आरोप कभी नहीं लगाए। जन्मभूमि श्रीराम की है और उसको तीन टुकड़े में बांट दिया जाए कि आप लोगों की धमकी का परिणाम था।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड मुसलमानों को डराने, धमकाने और उन्हें भड़काने से बाज आएं अन्यथा परिणाम उन्हीं के लिए विपरीत होंगे। बैठक में स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, डॉ. रामकमल दास वेदांती, महंत बालक दास समेत काफी संख्या में संत मौजूद रहे।
स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती का बयान आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आरोपों पर कि कोर्ट ने जीता का मौका न देते हुए जल्दबाजी में फैसला किया है। अदालतों के तौर तरीकों से भरोसा काम हो रहा है। ज्ञानवापी पर कोर्ट का फैसला तकलीफदेह है।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, "आज ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के बेहद गैर जिम्मेदाराना और संवैधानिक धमकियों को गंभीरता से लेते हुए आज काशी के लगभग ढाई सौ से तीन सौ संत जिसमें जगदगुरु शंकराचार्य, सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद, जी जगदगुरु अनंताचार्य, डॉक्टर राम कमल दास, वेदांती जी संत समिति के प्रवक्ता बालक दास जी समेत सभी पूज्य संत यहां उपस्थित थे और एक स्वर में निर्णय लिया गया कि संविधान को बंधक बनाने कोर्ट को धमकी देने के अपने रवैए से बाज आए मुस्लिम समाज आपको जो कहना है कोर्ट में कहें। यह देश संविधान से चलेगा शरिया से नहीं चलेगा।