पत्रकार वार्ता में जगद्गुरु बालक दास ने संसद परिसर में राहुल गांधी, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद द्वारा किए गए प्रदर्शन की आलोचना करते हुए इसे भगवान श्रीराम और सनातन धर्म का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना से करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस शीघ्र कार्रवाई नहीं करती है तो संत समाज इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगा। ।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राजनीति में बार-बार साधु-संतों और भगवा वस्त्रों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "रावण ने भी सीता हरण के लिए साधु का वेश धारण किया था और उसका परिणाम उसके पूरे वंश के विनाश के रूप में सामने आया। आज जो लोग संतों के स्वरूप का उपहास कर रहे हैं, वे अपने राजनीतिक भविष्य को स्वयं संकट में डाल रहे हैं।"
इस राष्ट्रव्यापी अभियान को श्री काशी विद्वत् परिषद ने भी समर्थन देने की घोषणा की। परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी तथा विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री अशोक तिवारी ने अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
अखिल भारतीय संत समिति की बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए महामंत्री और कई साधु-संत उपस्थित रहे। इनमें उत्तराखंड से महामंडलेश्वर अरुण दास महाराज, जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंस देवाचार्य के उत्तराधिकारी, मध्य प्रदेश से महंत हनुमान दास, छत्तीसगढ़ से स्वामी राधेश्याम दास, उत्तर प्रदेश से स्वामी रामानंद तीर्थ, गोवा से स्वामी हर्षिद्धानंद सरस्वती, पालघर में मिशनरियों को सीधी चुनौती देने वाले महाराष्ट्र के स्वामी भारतानंद, बिहार से स्वामी रणजीतेशानंद, ओडिशा से स्वामी सच्चिदानंद दास तथा पश्चिम बंगाल से ब्रह्म विद्यानंद सहित दक्षिण भारत के प्रतिनिधि शामिल रहे।
बैठक में आगामी 2 से 5 नवंबर तक "संस्कृति संसद" आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। इसकी शुरुआत 2 नवंबर को राम मंदिर आंदोलन में वीरगति प्राप्त कारसेवकों की स्मृति में रुद्राभिषेक के साथ होगी। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि संस्कृति संसद में देशभर की विभिन्न परंपराओं के 3,000 से अधिक संत भाग लेंगे।