सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जन सूचना का जवाब न देने और राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नही होने पर जनसूचना अधिकारी/ जिला परियोजना अधिकारी पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। राज्य सूचना आयुक्त ने आयोग के रजिस्ट्रार को जुर्माना वसूली वेतन से करने का आदेश दिया है।
रतनपुरा विकासखंड के सकरा ग्राम पंचायत निवासी विकाऊ प्रसाद मौर्य ने 30 मई 2018 को खंड विकास अधिकारी कार्यालय रतनपुरा जनपद मऊ से पांच बिंदुओ पर सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना मांगी थी। सूचना मांगने वाले विकाऊ प्रसाद मौर्य का आयोग में कहना था कि प्रथम अपीलीय अधिकारी ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों के तहत सुनवाई नहीं की। अपीलकर्ता ने उप्र सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत की।
इसमें उसके मूल आवेदन के क्रम में वांछित सूचनाएं उपलब्ध कराने तथा अधिनियम का अनुपालन करने के लिए प्रतिवादी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया। आयोग ने 29 नवंबर 2019 को प्रतिवादी जन सूचना अधिकारी को मूल आवेदन के क्रम में सूचनाएं देने के लिए आदेश दिया। आयोग की तरफ से जन सूचना अधिकारी को पर्याप्त समय देते हुए नोटिस जारी की गई। आयोग ने माना कि प्रतिवादी जन सूचना अधिकारी प्रस्तुत प्रकरण को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में जनसूचना अधिकारी/जिला परियोजना अधिकारी, विकास भवन को दोषी मानते हुए उसके विरुद्ध सूचना अधिकार की धारा 20(1) के तहत 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जो नियमानुसार तीन किस्तों में जमा किया जाएगा। इस बाबत जिला परियोजना अधिकारी मत्स्यनाथ त्रिवेदी का कहना है कि मामला संज्ञान में अभी नहीं आया है।