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आरटीई : संक्रमण और संसाधनों की कमी से घटी आवेदन में रुचि

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शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब व्यक्ति भी अपने बच्चों को अच्छे और महंगे स्कूलों में पढ़ा सक ते हैं। जिले के निजी विद्यालयों में दस हजार से अधिक सीटें है। यहां न तो प्रवेश शुल्क लगना है न ही महीने की फीस देनी है। बच्चों के दाखिले के बाद ड्रेस और कॉपी, किताब के पैसे भी अभिभावकों के खाते में दिए जाते हैं। बावजूद अभिभावक इस बार दाखिले को लेकर रुचि नहीं ले रहे हैं। एक ओर जहां आवेदन घटते जा रहे हैं। वहीं, ड्रॉ निकलने के बाद भी ज्यादातर अभिभावक बच्चों का दाखिला नहीं करा रहे हैं। कोरोना संक्रमण की वजह से निजी स्कूल बंद हैं। ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। सबसे अधिक परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को हो रही है। कहीं न कहीं संसाधनों की कमी की वजह से अभिभावक दाखिला दिलाने से कतरा रहे हैं। हालत यह है कि तीन चरणों में होने वाले आरटीई में आवेदन की संख्या भी घट रही है। आरटीई के जिला समन्वयक विमल कुमार केशरी ने बताया कि कोरोना काल में स्कूल बंद है, जिसकी वजह से आवेदन कम आए हैं। कई अभिभावक बच्चों के फॉर्म नहीं भर सके या दाखिले के लिए अनिवार्य दस्तावेज जमा नहीं कर पाए।
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दो साल में घट गए आवेदन
साल आवेदन चयनित दाखिला
2019-20 29000 16743 10330
2020-21 27500 13758 9180
इस साल दाखिले का है इंतजार
कोरोना की पहली लहर के बाद सत्र 2021-22 के लिए प्रथम चरण में 17,017 हजार आवेदन आए थे। 6875 बच्चों को स्कूल आवंटित किया गया। इसके बाद संक्रमण की वजह से स्कूल बंद कर दिए गए। दूसरे चरण के लिए सिर्फ 8700 आवेदन आए। 1,243 छात्रों को स्कूलों का आवंटन हुआ। इस बीच तीसरे चरण में केवल 917 आवेदन ही आए हैं। इसकी लॉटरी आज निकाली जाएगी।
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