चंदौली जिले के एआरटीओ (प्रवर्तन) आरएस यादव ने अपनों के साथ भी फरेब किया है। अपने दिवंगत मां-बाप और सास को नाम पर भी संपत्ति दिखाई है। आरएस यादव ने वाराणसी के अलावा लखनऊ, चंदौली, गोरखपुर, फैजाबाद और नई दिल्ली में निवेश किया है।
मिर्जापुर के जेल में निरुद्ध आरएस यादव के खिलाफ शनिवार को विजिलेंस इंस्पेक्टर की तहरीर पर कैंट थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपों के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
जांच करने वाले विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, उसकी पत्नी, बेटे, बेटियों, साले, कथित कर्मचारी और ड्राइवर द्वारा भी कोई संपत्ति अर्जित नहीं की जा रही थी, मगर सभी के नाम से यादव अपनी संपत्तियां वैध दर्शाता रहा। इन सभी के नाम पर उसने कई अचल संपत्तियां खरीदीं। कई धंधों में निवेश किया और कई कंपनियों के शेयर की खरीद-बिक्री की।
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे यादव को लखनऊ से लौटते समय 10 जून 2017 को जौनपुर के मछलीशहर से गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले नौ जून को उसे निलंबित कर मुगलसराय थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया था कि वह 19 वर्ष से वाराणसी मंडल में ही नौकरी कर रहा था।
यादव चंदौली जिले की नौबतपुर चेकपोस्ट से प्रतिमाह लगभग दो करोड़ रुपये की अवैध वसूली करता था। जिन ओवरलोड ट्रकों से उसे मनमाफिक रुपये नहीं मिलते, उन्हें रामनगर स्थित डंपिंग यार्ड में खड़ा करा देता था। इससे पहले यादव जल निगम में जूनियर इंजीनियर था।
1994 में प्रतिनियुक्ति पर वह परिवहन विभाग में आया तो फिर यहीं का हो गया। अपनी हनक की बदौलत यादव वाराणसी एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष के तौर पर रियो ओलंपिक में शामिल हुआ था।