इनके सहयोग के लिए विकास प्राधिकरण की एक नई टीम भी गठित की गई है। यहां बता दें कि कैंट से गिरिजाघर के बीच बने रोपवे रूट की निविदा पर किसी भी कंपनी ने रूचि नहीं दिखाई है। ऐसे मेें केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग लाजिस्टिक मैनजमेंट कंपनी लिमिटेंड को अब सर्वे का जिम्मा सौंपा गया है।
वीडीए उपाध्यक्ष ईशा दुहन ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग लाजिस्टिक मैनजमेंट कंपनी लिमिटेंड की ओर से सर्वे शुरू कर दिया गया है। एक सप्ताह में किसी भी निर्णय की उम्मीद है। विकास प्राधिकरण की ओर से रोपवे सर्वे के लिए टीम का गठन कर सर्वे में सहयोग दिया जा रहा है।
विकास प्राधिकरण ने करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर वैपकास कंपनी से रोपवे के लिए सर्वे कराया था। भारत सरकार की ओर से निर्धारित कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग लाजिस्टिक मैनजमेंट कंपनी लिमिटेड के सूचीबद्ध होने के बाद भी नई कंपनी का चयन किन कारणों से किया गया। इसके साथ ही वैपकास पर करोड़ों खर्च के बावजूद जीरो रिजल्ट पर भी मंथन किया जा रहा है।