रोपवे में 228 केबिन होंगे। हर तीन से चार मिनट के अंतराल पर यह सेवा उपलब्ध रहेगी। एक केबिन में 10 लोग सवार हो सकेंगे। 6.5 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से 17 मिनट में तय करेंगे। रोपवे से सफर करने वाला यात्री को वायु और ध्वनि प्रदूषण से राहत मिलेगी।
रोपवे स्टेशन और ट्रॉली पर वाराणसी की कला, धर्म और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। स्टेशन पर एस्केलेटर भी बनेगा। कैंट रेलवे स्टेशन और गोदौलिया चौराहे पर टर्मिनल स्टेशन बनेगा। परियोजना में एलाइनमेंट की कुल लंबाई 3.750 किलोमीटर निर्धारित की गई है।
अधिकारियों संग बैठक करते मुख्य सचिव
- फोटो : अमर उजाला
विकास कार्यों की समीक्षा करने वाराणसी पहुंचे मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना पर लंबी चर्चा की और कहा कि काशी पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं का शहर है। रोपवे कार्य यहां के लिए महत्वाकांक्षी योजना है। इसे शीघ्र शुरू कराकर गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कराया जाए।
शिव के डमरू आकार का बनने वाले मंडलीय कार्यालय भवन परियोजना पर कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बैठक में बताया कि तीन बार टेंडर के बाद भी कार्यदायी संस्था आगे नहीं आई है। पीपीपी मॉडल पर बनने वाली इस परियोजना में 30 वर्ष के लीज को 90 वर्ष और दोनों टॉवर के नीचे का हिस्सा व्यवसायिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराने की मांग है। मुख्य सचिव ने भारत सरकार के मान्यता प्राप्त आर्किटेक्ट संगठन से भवन के स्टीमेट का पुनर्मूल्यांकन का निर्देश दिया। साथ ही स्मार्ट व ग्रीन बिल्डिंग बनाए जाने पर जोर दिया।
मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने रविवार को नमो घाट का निरीक्षण किया तथा यहां से मोटरबोट से टेंट सिटी साइट पहुंच कर स्थलीय मुआयना किया। उन्होंने फरवरी की बजाय मई तक टेंट सिटी बसाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आमतौर पर मानसून 15 जून के बाद से शुरू होता है, इसलिए इसे मई तक क्रियाशील रखा जा सकता है।
गंगा पार रेती पर बनने वाले टेंट सिटी के संबंध में कमिश्नर ने बताया कि यह अक्टूबर से फरवरी तक रहेगी। मुख्य सचिव ने प्रयागराज के कुंभ को दुनिया का सबसे बड़ा टेंट सिटी बताते हुए कहां कि जिलाधिकारी इलाहाबाद के साथ इस संबंध में बैठक कर जरूरत पड़ने वाले अनापत्ति प्रमाण पत्रों आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त कर ली जाए। इसके साथ ही नमो घाट के निर्माण पर संतोष व्यक्त करते हुए यहां और सुविधाएं बढ़ाने का निर्देश दिया।