वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग ने बताया कि कहा कि दिसंबर तक रोपवे की सुरक्षा जांच होगी। लोड टेस्टिंग का काम तेजी से चल रहा है। रोपवे का संचालन अब 2026 में होगा। जब सभी 148 गंडोला का लोड रोप पर डालकर चला लिया जाएगा, तब रोपवे को आम जनता के लिए खोला जाएगा। यह काशी के लिए सिर्फ अत्याधुनिक अर्बन ट्रांसपोर्ट का साधन नहीं होगा बल्कि पर्यटन, रोजगार और शहर के आर्थिक विकास का नया द्वार खोलेगा।
रोपवे कॉरिडोर के 16 मीटर के दायरे के भवनों की ऊंचाई 10 मीटर से ज्यादा नहीं
उपाध्यक्ष ने बताया कि रोपवे कॉरिडोर के दोनों तरफ आठ-आठ मीटर के दायरे में भवनों की ऊंचाई 10 मीटर रखी गई है। यानी कुल कुल दायरा 16 मीटर का है। इस दायरे में ऊपर की तरफ निर्माण प्रतिबंधित रहेगा। 10 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई के भवन नहीं बनवाए जा सकेंगे। इसकी निगरानी कराई जाएगी। अलग-अलग जोन के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
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उपाध्यक्ष ने बताया कि नए कॉरिडोर के लिए सर्वे शुरू करा दिया गया है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो रही है। रोपवे सबसे बड़ा टावर 160 फीट है जो सिगरा सुविधा साड़ी केंद्र के पास है। कार्यदायी एजेंसी को 15 वर्ष संचालित करने के लिए अनुबंध किया गया। रोपवे की सुरक्षा के लिहाज से एक कंसल्टेंट इंजीनियर, रोपवे इंस्पेक्टर रखे जाएंगे।
रोपवे का किराया कम होगा, बजट होटल बनेगा
उपाध्यक्ष ने बताया कि रोपवे का किराया काफी कम होगा। इसकी नियमावली बन रही है। इसके आर्थिक विकास मॉडल की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। सभी स्टेशनों पर कॉमर्शियल गतिविधियां शुरू की जाएंगी। चारों स्टेशनों पर दो लाख स्क्वायर फीट में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की जाएंगी। बजट होटल बनेगा। दुकानों और होटलों के लिए अभी से काफी डिमांड आ रही है। आवंटन की प्रक्रिया नीलामी से पूरी की जाएगी।
उपाध्यक्ष ने बताया कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्वतमाला प्रोजेक्ट के तहत एशिया का पहला अर्बन रोपवे प्रोजेक्ट शहरी परिवहन (अर्बन ट्रांसपोर्ट) के रूप में काशी में शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट 3.8 किलोमीटर का है जो वाराणसी कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक रहेगा। इसके बीच कैंट के अलावा काशी विद्यापीठ, रथयात्रा स्टेशन हैं। गिरजाघर एक टेक्निकल स्टेशन है। इस प्रकार कुल 5 स्टेशन और 29 टावर बनाए जाएंगे। इस परियोजना की कुल लागत 815.58 करोड़ निर्धारित हुई है। इसमें 15 वर्षों का ओएंडएम (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) भी शामिल है।
ये है खासियत
- रोपवे से प्रति घंटे में 3000 लोग आ-जा सकते हैं। यानी 16 घंटे के संचालन में प्रतिदिन लगभग 96 हजार लोगों का आना-जाना होगा।
- यह क्षमता भारत के सबसे बड़े गुलमर्ग रोपवे की तुलना में 2.5 गुना अधिक है।
- हाई पावर ड्राइव्स एवं स्टैंडबाई सिस्टम्स, बड़े टर्मिनल्स, एडवांस्ड कंट्रोल, कम्युनिकेशन्स सिस्टम, बेहतर इवैक्यूएशन और रेस्क्यू प्रावधान हैं।
- लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और हाई क्वालिटी मेटेरियल्स (गंडोला और रोप्स सहित) का उपयोग किया जा रहा है।
- इमरजेंसी के लिए तीन लेयर ऑफ सेफ्टी बनाई गई है
- रोपवे घनी आबादी वाले अर्बन एरिया से होकर गुजरता है और मौजूदा बिल्डिंग्स के ऊपर से जाता है।
- कुल लागत में 15 वर्षों का ऑपरेशन और मेंटेनेंस शामिल है।
- इसमें ऑपरेशन, इलेक्ट्रिसिटी, जेनसेट, मैनपावर, स्टेशन सिक्योरिटी, क्लीनलीनेस, इक्विपमेंट्स की रिपेयर और मेंटेनेंस सम्मिलित हैं।
सोशल मीडिया पर रोपवे का दुष्प्रचार और अफवाह फैलाने मामले में रविवार की रात सिगरा थाने में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। डीसीपी काशी गौरव बंशवाल ने बताया कि एक्स हैंडल पर अशोक और और डॉ. शीतल यादव की आईडी से एक वीडियो प्रसारित किया गया। यह दिखाया गया कि बनारस में चार किमी का रोपवे 800 करोड़ की लागत से बना रोपवे का उद्घाटन होते ही गंडोला टूटकर नीचे गिरा। इसमें भाजपा के नेता भी नीचे गिर गए। दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। सिगरा इंस्पेक्टर संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि चौकी प्रभारी रोडवेज पुष्कर दुबे की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संबंध छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर का है।