वाराणसी। महाकवि विद्यापति महोत्सव का समापन समारोह हर किसी के लिए यादगार बन गया। मिथिला के गीत, लोकनृत्य और संस्कृति से काशीवासी भी रूबरू हुए। सांस्कृतिक संध्या में डॉ. विजय कपूर ने महाकवि विद्यापति की रचना कुंज भवन सएं निकसलि रे रोकल गिरिधारी, एकहि नगर बसु माधव हे जनि करु बटमारी... को स्वर देकर हर किसी को द्वापर युग की यात्रा कराई।
डाॅ. सुष्मिता झा ने गे माय चंद्रमुखी सन गौरी हमर..., पिया मोर बालक हम तरूनी गे..., जय जय मिथिला धाम... से दर्शकों की तालियां बटोरीं। नृत्यांगना डाॅ. ममता टंडन, डाॅ. रवि शंकर और विदिशा झा ने कथक पर मनोहारी प्रस्तुति दी। सुरभि के नृत्य निर्देशन में मिथिला का लोकनृत्य समा-चकेवा, जट-जटिन और झिझिया पर कलाकारों ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी। रविवार को दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव की अंतिम निशा का समापन प्रो आरआर झा की अध्यक्षता में नागरी प्रचारिणी सभा में हुआ।
समापन समारोह का उद्घाटन राज्यमंत्री रविन्द्र जायसवाल ने किया। मुख्य अतिथि रेल मंत्रालय में अधिशासी निदेशक रत्नेश झा ने कहा कि महाकवि विद्यापति हिंदी साहित्य के प्रथम कवि होने के साथ-साथ मैथिली भाषा साहित्य के भी प्रथम कवि थे। मनोज कुमार झा, प्रो. राजीव रंजन सिंह, साहित्यकार डाॅ. बुद्धिनाथ मिश्र, अखिलेश कुमार झा, प्रो. जयशंकर झा ने भी विचार रखे। संचालन गौतम झा, स्वागत डाॅ. कमलेश झा और स्वागत निरसन झा एडवोकेट ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सचिव दास पुष्कर ने किया।
मिला ग्लोबल लीडर और मिथिला रत्न
समापन समारोह में डाॅ. आदित्यनाथ झा ग्लोबल लीडर सम्मान समाजसेवी अजय झा, राकेश कुमार गुप्ता व यूबीआई के जीएम गिरिश जोशी को दिया गया। मिथिला रत्न प्रो. आरआर झा व प्रेमानंद मिश्र को दिया गया। गायिका डाॅ. सुष्मिता झा और रत्नेश झा को मिथिला भूषण सम्मान दिया गया। रंगकर्मी नंदिनी को राम की शक्ति पूजा के लिए यूथ आइकॉन और सीवान के समाजसेवी डाॅ. आलोक कुमार सिंह और निरंजन कुमार को भी यूथ आइकाॅन सम्मान दिया गया।