हैदराबाद यूनिवर्सिटी के शोध छात्र रोहित वेमुला की मृत्यु पर सियासत गरमा गई। बुधवार को काशी में कई जगहों पर रोहित को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए छात्रों, बुद्धिजीवियों, अध्यापकों व समाजसेवियों ने उसके हक की आवाज उठाई। बीएचयू के अनुसूचित जाति, जनजाति छात्र समिति व बीएचयू टीचर्स वेलफेयर सोसाइटी की ओर से सिंह द्वार बीएचयू से विरोध मार्च निकाला गया।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों व छात्रों ने हैदराबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अप्पाराव, केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तारात्रेय व मंत्री स्मृति ईरानी की भूमिका की कड़ी निंदा करते हुए उन सभी को पद से बर्खास्त करने के साथ पूरी घटना की सीबीआई जांच की मांग की।
महासचिव प्रो. एमपी अहिरवार व अध्यक्ष कुणाल किशोर के नेतृत्व में सिंह द्वार से रविदास गेट होते हुए रविंद्रपुरी स्थित बाबा अंबेडकर की प्रतिमा तक ये मार्च निकाला गया।
इसी तरह भगत सिंह छात्र मोर्चा ने सिंह द्वार पर हैदराबाद विश्वविद्यालय के कुलपति का पुतला फूंका। विरोध सभा की गई जिसमें बीएचयू के छात्र-छात्राओं के साथ ही अध्यापकों ने शिरकत की।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में जातिवादी आधार पर वंचित, दलित छात्रों का सामाजिक बहिष्कार हो रहा है। पुतला दहन में शैलेश, आरती, आमृता, विनय, अनुपम, राजेश, सोनाली आदि शामिल रहे।
वहीं साझा संस्कृति मंच की ओर से सर्वसेवा संघ परिसर में इस मुद्दे पर बैठक हुई। अनूप श्रमिक, अरविंद अंजुम, मुनीजा खान, वल्लभ पांडेय, धनंजय त्रिपाठी, जागृति राही ने अपने विचार रखे।
इसी क्रम में मानवाधिकार जननिगरानी समिति ने पांडेयपुर स्थित अपने केंद्रीय कार्यालय में बैठक की। दो मिनट का मौन रखकर पहले रोहित वेमुला को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
डॉ. लेनिन ने इस घटना को अमानवीय बतलाया। उधर काशी के शिक्षकों की ओर से शाम पांच बजे सिंह द्वार पर रोहित के लिए शोकसभा हुई।
उन्होंने कहा कि इस घटना ने देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था को कलंकित करने के साथ सवालिया निशान लगा दिया है। सभा में डॉ. काशीनाथ सिंह, प्रो. दीपक मलिक, प्रो. चौथीराम, प्रो. एमपी सिंह, डॉ. एमपी सिंह, डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. प्रशांत शुक्ल, डा. मोहम्मद आरिफ, डॉ. निरंजन सहाय आदि मौजूद रहे।