रॉड लगा न बदला रंग, आदेश हवा-हवाई
यातायात व्यवस्था में सुधार के परिवहन विभाग के अफसरों के आदेश सिर्फ हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। आम जन की सुरक्षा से जुड़े बिंदुओं पर सख्ती से अमल कराने के बजाए अफसर केवल तारीख पर तारीख दे रहे हैं। एक मार्च को ऑटो में दाहिनी तरफ रॉड लगवाने का निर्णय लिया और इसके लिए 31 मार्च तक की मोहलत दी गई थी। 31 मार्च को संभागीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक में यह अवधि पंद्रह दिन और बढ़ा दी गई। इसी तरह, शहर और गांव में चलने वाले ऑटो के अलग-अलग रंग करने संबंधी आदेश भी हवा-हवाई साबित हुआ। परिवहन विभाग की सुस्ती ही है कि शहर में 20 हजार से ज्यादा डग्गामार ऑटो फर्राटा भर रहे हैं।
संभागीय परिवहन अधिकारी आरपी द्विवेदी की ओर से एक मार्च को ऑटो में रॉड लगाने संबंधी आदेश जारी किया गया था। रॉड लगवाने के लिए 31 मार्च तक की मोहलत दी गई थी। आदेश में कहा गया था कि रॉड लगवाए बिना किसी भी ऑटो का फिटनेस नहीं किया जाएगा। परिवहन अधिकारियों ने आदेश तो जारी कर दिया लेकिन इसका पालन अब तक नहीं कराया। कुछ ऑटो को छोड़ दें तो डग्गामार ऑटो बिना रॉड लगवाए ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। एक भी ऑटो का चालान नहीं किया गया। 31 मार्च को संभागीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक में फिर यह मुद्दा उठाया गया। चर्चा के बाद एक बार फिर ऑटो चालकों को रॉड लगवाने और रंग कराने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई। शहर में चलने वाले ऑटो का रंग काला-पीला और ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाले ऑटो का रंग सफेद-काला होगा।