रंग-बिरंगे बल्ब, झालरों, पताकाओं से काशी की रौनक बदलने लगी है। सड़कों पर लुभावने स्वागत द्वार और लतर की छतरियां सांझ ढलने के साथ ही जगमगाने लगी हैं। कहीं बांग्ला में देवी गीतों की गूंज सुनाई दे रही है तो कहीं भोजपुरी भजनों की मधुर धुनें माहौल को भक्तिमय बना रही हैं। ढाक, शंखध्वनि प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से पंडालों को संगीतमय बनाने की तैयारी अंतिम दौर में है। नवरात्र महोत्सव सोमवार से शुरू होगा। दुर्गा पूजा पंडालों के सजने के साथ ही शहर त्योहारी खुमारी में डूबने के लिए तैयार हो गया है।
गणेश प्रतिमा विसर्जन विवाद में लाठीचार्ज और फिर अन्याय प्रतिकार यात्रा के बाद बवाल के चलते अस्त-व्यस्त हुआ शहर का माहौल शारदीय नवरात्र के बहाने बदल रहा है। हालांकि प्रतिमाओं के आर्डर में कमी और कुछ मूर्तियों की वापसी की वजह से जहां मूर्तिकारों को झटका लगा है, वहीं सजावट बाजार भी प्रभावित हुआ है। बवाल में नामजद होने के बाद से गोल्डेन स्पोर्टिंग क्लब, नवसंघ, सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति, सनातन धर्म इंटर कॉलेज की दुर्गापूजा समिति समेत कई क्लबों के कई पदाधिकारी फरार हैं। ऐसे माहौल के बीच प्रशासन के समझाने-बुझाने के बाद समितियां पंडाल सजाने और प्रतिमाएं लगाने में जुट गई हैं।
हरतीरथ की दुर्गापूजा समिति ने प्रतिमा न लगाने का फैसला किया था लेकिन रविवार की शाम इस समिति के अध्यक्ष चंद्रभूषण शुक्ला ने इरादा बदल दिया। इसी तरह सनातन धर्म इंटर कॉलेज में भी 20 फीट की दुर्गा प्रतिमा की स्थापना का निर्णय लिया गया। बवाल में नामजद इस समिति के अध्यक्ष सूरज जायसवाल ने बताया कि प्रशासन ने उत्पीड़न न करने का भरोसा दिलाया है। ऐसे में पूजा की तैयारी की जा रही है। बुलानाला से लेकर चौक तक की सड़कों की पटरियों पर रंग-बिरंगे बल्बों से मोहक सजावट को अंतिम रूप दे दिया गया है। जंगमबाड़ी, सोनारपुरा के अलावा ठठेरी बाजार, सिद्धिमाता गली, चौखंभा की गलियां भी लतरों से जगमगा उठी हैं।