कचहरी स्थित कूड़ा घर के पास सड़क पर लगी वाहनों की कतार।
नगर निगम प्रशासन का ये हाल देखिए। सड़क और फुटपाथ पर तो पार्किंग बनाई ही, कूड़ाघर तक नहीं छोड़ा। कचहरी के पास कूड़ाघर से लगायत आसपास की पूरी सड़क पार्किंग अड्डे में तब्दील हो गई है। सर्किट हाउस से मंडलायुक्त कार्यालय तक दोनों किनारों पर सैकड़ों दो पहिया और चार पहिया वाहन आधी सड़क घेरे रहते हैं। नतीजा, रोजाना जाम। हालात ऐसे होते हैं कि पैदल आना-जाना भी मुश्किल होता है लेकिन इस ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं। जबकि, प्रशासन के उच्चाधिकारियों के यहीं कार्यालय हैं। अक्सर आवाजाही होती रहती है। सर्किट हाउस आने वाले वीवीआईपी और जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते गुजरते हैं लेकिन इतना सबके बाद भी यदि स्थिति जस की तस बनी हुई है तो यह समझा जा सकता है कि आम जन सुविधाओं के प्रति वास्तव में कितनी गंभीरता बरती जा रही है।
कचहरी क्षेत्र में बेतरतीब पार्किंग से हर कोई परेशान है। कहने को आम जन सुविधा के लिए यह पार्किंग खोली गई लेकिन हकीकत इससे अलग है। निगम के अफसरों और ठेकेदारों के सिंडिकेट को भले सहूलियत हो लेकिन इसके चलते रोजाना जाम की सांसत से आम जन बेहाल हैं। कचहरी के समीप मुख्य मार्ग पर स्थित कूड़ा घर और उसके आसपास की पूरी सड़क पार्किंग अड्डे में तब्दील हो जाती है।
अब ऐसे में वाहनों की सुचारु आवाजाही हो तो कैसे हो। जरा सा दबाव बढ़ा नहीं कि पूरी सड़क जाम और फिर वाहनों की आवाजाही छोड़िए, पैदल आना-जाना भी मुश्किल हो जाता है। कूड़ा घर ही नहीं, मंडलायुक्त कार्यालय और विकास भवन के सामने वाहनों की लंबी कतार होती है। वाहनों के रेले के बीच से फरियादियों का कार्यालयों मेें प्रवेश करना मुश्किल हो जाता है। नगर निगम और ठेकेदारों के सिंडिकेट की मनमानी सर्किट हाउस से मंडलायुक्त कार्यालय तक ही सीमित नहीं है। कचहरी पुलिस चौकी से सिविल कोर्ट के बाहर, स्टेट बैंक तक वाहनों का रेला लगा रहता है। इसके चलते इस पूरे इलाके में दिनभर जाम की स्थिति रहती है। कचहरी क्षेत्र का ऐसा इलाका है कि यहां हमेशा वीवीआईपी का आगमन होता रहता है। मंत्री से लेकर उच्चाधिकारी इसी रास्ते रोजाना गुजरते हैं लेकिन पार्किंग को व्यवस्थित करने की कभी कोई ठोस पहल नहीं हुई।