भारतीय सनातन संस्कृति की ध्वजवाहिका माँ गंगा से आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों ही प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। ऐसी जीवनदायिनी, मोक्षदायिनी मां गंगा का धराधाम पर निर्मल व अविरल स्वरुप में होना आवश्यक ही नहीं अपरिहार्य है। यह कहना है जल शक्ति मंत्रालय से जुड़ी नमामि गंगे गंगा विचार मंच के वाराणसी जिला संयोजक शिवम अग्रहरि का।
राजघाट पर नमामि गंगे वाराणसी महानगर की ओर से स्वच्छता अभियान चलाया गया। शिवम के नेतृत्व में गंगा निर्मलीकरण की अलख जगाते हुए टीम ने श्रमदान कर गंगातलहटी से प्रदूषण कारक वस्तुओं को बाहर निकाला तदुपरांत निस्तारण हेतु भेजा। इजय विश्वकर्मा, किरण पांडेय व नगर निगम से टीपू, सादाब, संदीप रहे।
गंगा द्वार पर जगाई स्वच्छता की अलख
भारत की आस्था और आजीविका मां गंगा के निर्मलीकरण के लिए एकजुट होने की गूंज बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार पर सुनाई पड़ी। नमामि गंगे ने ‘सबका साथ हो गंगा साफ हो’ का संदेश देकर भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदंड व सनातनी अध्यात्म का सार गंगा के लिए जागरूक होने का आवाह्न किया।
नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि मां गंगा सहित अन्य गंगा की सहायक नदियों में लोग अपने घर की बासी पूजा सामग्री, साड़ियां, कपड़े भी डाल देते हैं। राजेश शुक्ला ने बताया कि 50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है।
25 करोड़ लोग तो पूर्ण रूप से गंगाजल पर आश्रित है। आइए, मां गंगा के आंचल को कचरे से बचाएं। गंगा का संरक्षण करें। आयोजन में नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला, दिनेशचंद्र गुप्ता, अनुभव, जितेंद्र सिंह, सुमन गुप्ता, सुनीता, शुभम, संजय एवं ट्विंकल शामिल रहे।