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अस्सी से राजघाट तक विकसित होगा रिवर फ्रंट

Sun, 28 Dec 2014 02:06 AM IST
वाराणसी,अमर उजाला ब्यूरो
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काशी के गंगा घाटों पर समान ऊंचाई का पाथ वे बनेगा, जिससे आसानी से लोग साढ़े सात किलोमीटर के अर्धचंद्राकार गंगा तट पर भ्रमण कर सकें और ह्वीलचेयर के सहारे घूमने वाले बुजुर्ग भी सुबह-ए-बनारस का लुत्फ उठा सकें।
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इसके अलावा जगह-जगह बैठने के लिए बेंचें लगवाई जाएंगी और पेयजल का भी बंदोबस्त किया जाएगा। वाराणसी विकास प्राधिकरण ने गंगा घाटों को आकर्षक रूप देने के लिए नए सिरे से कवायद शुरू कर दी है। वीडीए अस्सी से राजघाट तक गंगा रिवर फ्रंट बनाने की कार्ययोजना तैयार करने में जुट गया है।
इसके लिए सिंचाई विभाग, जल निगम, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, नगर निगम और वास्तुविदों की मदद लेने की तैयारी है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने बीते शनिवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सिंचाई व लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात की थी। वाराणसी विकास प्राधिकरण के सचिव एमपी सिंह ने बताया कि बैठक में तय हुआ कि गंगा को स्वच्छ रखने के लिए अब नालों का दूषित पानी इसमें मिलने से रोका जाए।
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इसके तहत गंगा तट पर दीवारनुमा पाथ वे बना कर शहर की गंदगी को इसके भीतर से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाए। एसटीपी संबंधी जो भी काम अधूरे पड़े हैं उन्हें शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने को कहा गया है। काशी के ऐतिहासिक घाट कैसे और आकर्षक दिख सकते हैं, इसके लिए रिवर फ्रंट डेवलेपमेंट की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
उन्होंने बताया कि काशी के घाट ऊंचे-नीचे और आगे-पीछे हैं। इसको देखते हुए एकसमान ऊंचाई पर पाथ वे बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इसमें अस्सी से राजघाट तक एक समान ऊंचाई पर पाथ वे बनाने के अलावा घाटों पर प्रकाश, पेयजल, प्रसाधन, बैठने के स्थान, चेंजिंग रूम और फूड कार्नर के साथ ही नालों के पानी को गंगा में मिलने से रोकने की व्यवस्था भी की जाएगी।
उच्च न्यायालय का आदेश आएगा आड़े
वीडीए भले ही गंगा तट को आकर्षक रूप देने की कार्ययोजना तैयार कर ले, जानकारों का कहना है कि इसके क्रियान्वयन में उच्च न्यायालय इलाहाबाद का आदेश आड़े आएगा। कौटिल्य सोसायटी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने फिलहाल गंगा तट के दो सौ मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगा रखी है।
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