इस बंधे के बनाने में घोर अनियमितता बरती गई। ग्रामीणों ने पुरजोर इसका विरोध किया लेकिन जनप्रतिनिधियों ने काम की गुणवता को मंच से सही ठहराया। सच सामने आते देर न लगी और यह बंधा 2018 की हल्की बाढ़ में टूट गया।
मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। हालात यह है कि इस साल बंधे पर फ्लड फाइटिंग के तहत करीब 40 लाख रुपये का कार्य कराया गया, जिसमें जमकर धन का बंदरबांट हुआ और यह बंधा फिर एक बार गंगा के लहरों में समा गया। इसके कारण उदईछपरा, दुबेछपरा, गोपालपुर, प्रसाद छपरा आदि गांवों की करीब 35 हजार की आबादी पानी से घिर गई।
उधर, एक पखवारा पहले भी यह बंधा गंगा का जलस्तर घटने के दौरान कटान से टूटा था। उस समय पर आला अफसरों ने चेताया था कि अगर बंधा टूटा तो बाढ़ विभाग के अधिकारियों की खैर नहीं। हालांकि संयोग अच्छा था जलस्तर कम होने के कारण पानी किसी गांव में नहीं पहुंचा था। अब इस बार बंधा टूटा है और जलस्तर भी बढ़ाव पर है। लिहाजा बड़ी तबाही से इंकार नहीं किया जा सकता।
सामान लेकर दुबेछपरा ढाले पर पहुंचे लोग :
जैसे ही बंधा टूटने की खबर उर्दछपरा और गोपालपुर के लोगों तक पहुंची, लोग अपने सामान को गाड़ियों और ठेलों पर लाद कर दुबेछपरा ढाले पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों के अनुसार यह हालत देर सवेर होनी ही थी। क्योंकि बाढ़ विभाग के अधिकारियों ने जमकर दुबेछपरा रिंग बंधे के काम में अनियमितता बरती थी।