जिले के लगभग 40 फीसदी विद्यालयों ने आवंटित सभी बच्चों का दाखिला नहीं लिया है। किसी ने कुल आवंटित बच्चों का 55 तो किसी ने 45 फीसदी एडमिशन ही लिया है। इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने चार निजी विद्यालयों पर कार्रवाई के लिए सीबीएसई को लिखा है। साथ ही एक बड़े विद्यालय को नोटिस जारी कर एडमिशन न लेने का कारण पूछा है।
आरटीई के तहत स्कूलों को गरीब बच्चों का दाखिला लेने का प्रावधान है। उनकी फीस और किताब-कॉपियों का भुगतान सरकार करती है। मगर जिले के कई स्कूल इसका पालन नहीं कर रहे। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने केके चतुर्वेदी मेमोरियल सोसाइटी के चार विद्यालयों पर कार्रवाई के लिए सीबीएसई बोर्ड के सचिव को लिखा है। साथ ही आर्यन इंटरनेशनल स्कूल बाईपास को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
बेसिक शिक्षा कार्यालय के मुताबिक केके चतुर्वेदी मेमोरियल सोसाइटी के स्कूलों में आरटीई के तहत 28 बच्चों का दाखिला होना था, लेकिन उन्होंने 10 को दाखिला दिया। इसी तरह आर्यन इंटरनेशनल स्कूल में 14 बच्चे प्रवेश के लिए आवंटित किए गए थे, लेकिन नौ का ही दाखिला लिया गया।
आरटीई से प्रवेश का यह है प्रावधान
आरटीई के तहत स्कूलों में गरीब तबके के बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। सरकार उन्हें किताब, कॉपी आदि का खर्च देती है। किताब के लिए 5000 रुपये प्रति विद्यार्थी के हिसाब से उनके खाते में सरकार देती है। जबकि फीस के लिए 450 रुपये प्रति माह की धनराशि सीधे विद्यालयों के खाते में भेजती है। प्री-प्राइमरी और कक्षा एक में एडमिशन ऑनलाइन आवेदन के बाद लॉटरी के जरिये किया जाता है।
788 स्कूलों को 50 करोड़ का भुगतान
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अरविंद पाठक के मुताबिक आरटीई के तहत बकाया फीस के भुगतान के लिए विद्यालयों से क्लेम मांगा गया था। दिसंबर-2023 तक आरटीई के तहत कुल बकाया 50 करोड़ रुपये का भुगतान 788 विद्यालयों को कर दिया गया है। इसके बाद अन्य किसी विद्यालय ने मांग नहीं भेजी है। जो विद्यालय डिमांड कर रहे हैं, उनका भुगतान किया जा रहा है।