रिंग रोड योजना के प्रभावित गांवों के किसानों की शुक्रवार को हुई महापंचायत में डेढ़ हजार अधिक लोग शामिल हुए। हक के लिए किसानों ने पूरी एकजुटता से आवाज उठाई। एलान किया गया कि किसान अपनी जान दे देंगे लेकिन बिना पूरे मुआवजे के अपनी इंच भर भी जमीन नहीं देंगे। किसानों ने इस दौरान प्रशासन को जमकर कोसा। साथ ही, यह दोहराया कि वे विकास विरोधी नहीं हैं, उन्हें सिर्फ नए सर्किल रेट के आधार पर अपना हक चाहिए और इसके लिए हर स्तर पर वे संघर्ष के लिए तैयार हैं।
हृदयपुर में हुई इस महापंचायत में संदहा से हरहुआ तक बन रहे रिंग रोड से प्रभावित गांवों के किसान और किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। जिला किसान न्याय मोर्चा के प्रदेश संयोजक महेंद्र प्रसाद ने कहा कि अगर किसानों को नए सर्किल रेट से मुआवजा नहीं मिला तो रिंग रोड कुरुक्षेत्र बन जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन से वार्ता भी होगी और जब तक जिला प्रशासन नए सर्किल रेट से मुआवजे के लिए लिखित रूप में नहीं देता, किसान अपना आंदोलन जारी रखेंगे। प्रवक्ता विजय शंकर पांडेय ने कहा कि प्रशासन हमें न समझाए कि आंदोलन का तरीका क्या होगा। हमें कोई राजनीति नहीं करनी है। किसान हूं, इसलिए किसान की बात करता हूं। पूर्व एमएलसी अरविंद सिंह ने जिला प्रशासन के अधिकारियों पर जमकर निशाना साधा। कहा कि कानून व्यवस्था का उल्लंघन किसान नहीं करेंगे लेकिन जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल जाता तब तक वे मानेंगे भी नहीं।
किसान बिंदु देवी ने कहा कि अधिकारी और नेता कूलर और एसी में आराम कर रहे हैं और इस तपती धूप में किसान अपने हक के लिए रिंग रोड की धूल फांक रहे हैं। जरूरत पड़ी तो हम जान भी दे देंगे लेकिन बिना समुचित मुआवजे के लिए इंच भर भी जमीन नहीं देंगे। ज्योति पटेल सहित कई अन्य महिलाओं ने भी मंच से अपने दर्द और गुस्से का इजहार किया। कम्यूनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव हीरा लाल ने कहा कि शासन-प्रशासन की जोर-जबरदस्ती नहीं चलेगी। किसानों को उनका हक देना ही होगा। किसान जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। आम आदमी पार्टी के शहर संयोजक राकेश पांडेय, कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता विजय कुमार पटेल सहित कई अन्य लोगों ने भी महापंचायत को संबोधित किया। अध्यक्षता रामबली पटेल और संचालन रमापति यादव ने किया।
महापंचायत में निर्णय लिया गया कि किसानों का प्रतिनिधिमंडल 19 अप्रैल को आ रही केंद्रीय टीम से मुलाकात करेगा। साथ ही, पीएम के संसदीय कार्यालय पर ज्ञापन सौंपेगा। जब तक भूमि अधिग्रहण के नए अधिनियम एक जनवरी 2014 के आधार पर मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता तब तक किसान अपनी भूमि पर रिंग रोड नहीं बनने देंगे।