ज्ञानवापी मामले में वादमित्र ने पुनरीक्षण याचिका खारिज करने की मांग की। अब अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के अधिवक्ता को पक्ष रखने का अवसर दिया गया। वहीं मामले में अब दो नवंबर को होगी अगली सुनवाई।
ज्ञानवापी के एक मामले में शनिवार को सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत में वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की ओर से 11 जुलाई 2025 को पारित आदेश विधिसम्मत है। इसके खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण याचिका अनावश्यक और पोषणीय नहीं है इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
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वादमित्र की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के अधिवक्ता को पक्ष रखने का अवसर देते हुए अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तिथि तय कर दी।
ज्ञानवापी परिसर में मंदिर निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने से संबंधित वर्ष 1991 के मुकदमे में पक्षकार बनाने और वादमित्र को हटाने की मांग खारिज किए जाने के आदेश के खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर शनिवार को सुनवाई हुई।
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दरअसल, मुकदमे के वादी पक्षकार हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनकी तीन बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेनू पांडेय ने खुद को पक्षकार बनाने की अर्जी दी थी। साथ ही वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने की मांग की थी। अदालत ने 11 जुलाई 2025 को दोनों प्रार्थना पत्र पोषणीयता के आधार पर खारिज कर दिए। इसी आदेश को तीनों बहनों ने पुनरीक्षण याचिका के जरिये चुनौती दी है।