प्रस्तावित कार्य नहीं कराए गए, लेकिन अभिलेखों में पूरा दिखाए गए। मस्टररोल तैयार करके शासन से प्राप्त खाद्यान्न के वितरण में गंभीर अनियमितता की गई। श्रमिकों को खाद्यान्न न देकर उसे बाजार में बेचा गया और प्राप्त धनराशि की बंदरबांट की गई।
इस मामले में संयुक्त निदेशक सतर्कता अधिष्ठान ने 20 फरवरी 1995 को जांच का आदेश दिया था। विवेचना के बाद कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। 20 अप्रैल 2015 को आरोप तय किया गया था। अदालत ने 10 गवाहों के बयान के बाद लोकसेवक रहते हुए गंभीर प्रवृत्ति के अपराध को देखते हुए अभियुक्त कैलाश सिंह को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।