वाराणसी मंडल में सपा की स्थिति मजबूत
जौनपुर और गाजीपुर में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पूर्वांचल के कई जिलों में बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। मगर, उसके सामने बहुमत जुटाने की चुनौती है। 83 सीटों वाले जौनपुर में सपा समर्थित 35 सदस्यों के जीतने का दावा किया गया है। भाजपा के दस सदस्य जीते हैं। 67 सीटों वाले गाजीपुर में सपा के सिंबल पर और समर्थन से 22 सदस्यों के जीतने का दावा है। भाजपा को यहां सात सीटें मिली हैं। चंदौली में भाजपा 8 तो सपा 11 सीटों पर काबिज है। 35 सीटों वाले चंदौली जिले में पांच सीटें बसपा के पास तो 11 निर्दलीयों के पास हैं। वाराणसी में 40 सीटों में से भाजपा 7, सपा 11, बसपा चार, कांग्रेस एक और अपना दल सहित अन्य का 16 सीट पर कब्जा हैं। ऐसे में वाराणसी में अगर विपक्ष एकजुट होने में कामयाब रहा तो भाजपा के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है। यहां एक सीट रिक्त हो गई है।
विधायकों की कार्यशैली पर सवाल
पंचायत चुनाव के नतीजे भविष्य मेें होने वाले विधानसभा चुनाव की भी तस्वीर खींच रहे हैं। जिला पंचायत के चुनाव वाराणसी के पिंडरा, सेवापुरी, रोहनिया, अजगरा और शिवपुर विधानसभा क्षेत्र से सीधे तौर पर जुड़े हैं। पिंडरा से भाजपा से डा. अवधेश सिंह, सेवापुरी से अपना दल के नील रतन पटेल, रोहनिया से भाजपा के सुरेंद्र नारायण सिंह, अजगरा से सुभासपा के कैलाश सोनकर और शिवपुर से भाजपा के अनिल राजभर विधायक हैं। भाजपा के विधायकों का अपने विधानसभा में कमजोर प्रदर्शन उनकी कार्यशैली पर सवाल भी खड़ कर रहा है।
भाजपा पूरे जिले में महज सात जिला पंचायत सदस्य जीत पाई। रोहनिया और सेवापुरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। इसके अलावा सेवापुरी और अजगरा कैबिनेट मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय का क्षेत्र है। शिवपुर से विधायक अनिल राजभर प्रदेश में कैबिनेट मंत्री हैं। इसके बावजूद भाजपा का कमजोर प्रदर्शन संगठन के टिकट बंटवारे से लेकर चुनावी प्रबंधन तक की कमी के साथ ही जनप्रतिनिधियों की जनता के बीच पैठ पर सवाल है।
पूर्वांचल निभाता है परिणाम में अहम भूमिका
ऐसा माना जाता है कि पूर्वांचल के मतदाता कभी किसी एक पार्टी के साथ नहीं रहे हैं। 2007 में बसपा पर विश्वास जताया था तो 2012 में सपा को जनमत दिया था। इसके बाद 2017 के चुनाव में भाजपा पर विश्वास किया था। यूपी में पूर्वांचल से तकरीबन 33 प्रतिशत सीटें आती हैं। पूर्वांचल के 28 जिलों से 164 विधानसभा सीटें आती हैं। पूर्वांचल की राजनीतिक दशा और दिशा वाराणसी, जौनपुर, भदोही, आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, संत कबीरनगर बस्ती, मऊ, गाजीपुर, बलिया, बहराइच, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज आदि तय करते हैं। पंचायत चुनाव के परिणाम में तकरीबन 25 प्रतिशत वोट सपा को मिले हैं तो वहीं भाजपा और बसपा ने करीब 15 प्रतिशत वोट प्राप्त किए हैं।