रामनगर के बलुआ घाट में बारादरी के खंभे से कुत्ता टकराया था। खंभे के हिलने से बारादरी की छत गिर गई। उसके नीचे दबकर एक बुजुर्ग और एक कुत्ते की जान चली गई। यह खुलासा डीएम एस राजलिंगम की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट में जांच अधिकारियों ने लिखा है कि 10 करोड़ रुपये से कराए जा रहे काम में तकनीकी खामियां हैं। निर्माण सामग्रियों में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है। दोयम दर्जे की निर्माण सामग्री इस्तेमाल की गई है। काम कराने वाले ठेकेदार के अलावा मॉनिटरिंग करने वाले यूपीपीसीएल के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हो-हल्ला मचाने के बाद आनन-फानन में जांच कमेटी बैठा दी गई। जांच की कार्रवाई का कोरम पूरा कर दिया गया। जबकि, इस मामले में न तो ठेकेदार से रिकवरी की गई है और न अधिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई की गई।
रामनगर किला के समीप स्थित बलुआ घाट का नामकरण पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री घाट किया गया है। 130 मीटर लंबे घाट पर सुंदरीकरण का कार्य कराया जा रहा था। चंदौली के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के परोरवा गांव निवासी मजदूर मेवालाल उर्फ बाबाजी (60) पर 12 सितंबर को गुंबदनुमा छत भहरा कर ऊपर गिर पड़ी। मलबे के नीचे दबे मेवालाल की मौके पर ही मौत हो गई। मलबे के नीचे दबकर मलहिया निवासी भाईलाल के पालतू कुत्ते ने भी दम तोड़ दिया था।
पीएम के संसदीय क्षेत्र के विधायक की शिकायत को किया अनसुना
पीएम के संसदीय क्षेत्र के कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने एक साल पहले ही इस मामले की शिकायत की थी। विधायक ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले पर्यटन मंत्री से शिकायत की थी। इसके बाद यूपीपीसीएल के एमडी ने अपने ही विभाग के अधिकारियों से जांच कराकर हल्की रिपोर्ट दे दी। उस रिपोर्ट में 6-7 बिंदु ऐसे थे जिससे वह संतुष्ट नहीं थे। इसकी शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री से की थी। मुख्यमंत्री ने डीएम के जरिये पीडब्ल्यूडी से इसकी जांच करने को कहा था।
यूपीपीसीएल में चल रहा चेहरा बदलने का खेल
हादसे के बाद यूपीपीसीएल अपने अधिकारियों को बचाने में लग गया है। यही कारण है कि चेहरे बदलने का खेल शुरू हो गया है। यूपीपीसीएल के जीएम दिनेश कुमार को उनके मूल सिंचाई विभाग भेज दिया गया है। वह डेपुटेशन पर यूपीपीसीएल में गए थे। रामनगर के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रवीण कुमार शर्मा को मुख्यालय से संबंध कर दिया गया है। अयोध्या के प्रोजेक्ट मैनेजर वीके जैन को अतिरिक्त प्रभार थमा दिया गया है। घटना की जिम्मेदार सहायक अभियंता दिलीप कुमार और अवर अभियंता रेनू जायसवाल को निलंबित कर प्रयागराज भेजा जा चुका है।
हादसे के बाद गलियों के सुंदरीकरण का प्रस्ताव तैयार करने की दी जिम्मेदारी
जिस यूपीपीसीएल के घटिया निर्माण कार्य के चलते हादसा हुआ, उसी को हादसे के बाद शहर की गलियों के सुंदरीकरण का प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी दे दी गई है। जिले के एक आला अधिकारी ने जनप्रतिनिधियों के साथ सर्किट हाउस में 18 सितंबर को हुई समन्वय बैठक में यूपीपीसीएल को शहर की गालियों के सुंदरीकरण का प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई।
पत्थरों को जोड़ने के लिए मेल-फीमेल तकनीक का नहीं हुआ इस्तेमाल
यूपीपीसीएल के रिटायर्ड इंजीनियर बीके सिंह ने बताया कि पत्थरों को जोड़ने के लिए एक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। हाथ से उठने वाले पत्थरों के लिए यह केमिकल पर्याप्त होता है। मगर, जो भारी और वजनी पत्थर होते हैं उनको एक विशेष प्रकार की तकनीक से लॉक किया जाता है।
दो पत्थरों को आपस में जोड़ने के लिए मेल-फीमेल तकनीक का इस्तेमाल होता है। दोनों पत्थरों में होल किया जाता है, आपस में जोड़ने के बाद उन दोनों होल में मोटी पत्थर की लाॅक लगाई जाती है, उसके बाद चिपकाने वाले केमिकल एरलडाइट से चिपकाया जाता है।
जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने कहा कि हादसे के बाद जांच कमेटी बैठाई गई थी। जांच कमेटी की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जांच रिपोर्ट में कई कमियां उजागर हुई है। जिस पर आगे की कार्रवाई शासन स्तर से होगी।