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बेसिन में बसे लोगों को बिना उजाड़े होगा कायाकल्प

Sat, 11 Jun 2016 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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काशी में असि नदी के उद्गम से लेकर संगम तक का कायाकल्प किया जाएगा। देश के जाने-माने तकनीकी विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का मानना है कि देश में कहीं गंगा भले न ठीक हो पाए लेकिन काशी में असि का उद्धार करके पतित पावनी की धारा को भी निर्मल कर लिया जाएगा। इस आधार पर असि नदी को नाला मुक्त बनाने की कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। खास बात यह है कि विशेषज्ञ चाहते हैं कि असि नदी को पुनर्जीवित करने का काम बिना किसी को नुकसान पहुंचाए किया जाए, ताकि नदी किनारे प्रदूषण की मार झेलने वाली आबादी को चौबीस घंटे उठने वाली दुर्गंध से निजात मिले और नदी भी निर्मल हो जाए।
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असि नदी के उद्धार की इस महत्वाकांक्षी योजना को बीएचयू साकार करेगा। गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट प्लान के समन्वयक और प्रसिद्ध तकनीकी विशेषज्ञ प्रो. विनोद तारे असि नदी के उद्धार की योजना तैयार कर रहे हैं। इसके लिए असि रिवर मैनेजमेंट प्लान बनाया जा रहा है। वैज्ञानिक तथ्यों, आंकड़ों के आधार पर नदी को पुनर्जीवित करने की तैयारी है। इस योजना को साकार करने में बीएचयू में नदियों पर शोध के लिए स्थापित महामना मालवीय रिसर्च सेंटर फॉर गंगा रिवर डेवलपमेंट एंड वाटर रिसोर्सेज मैंनेजमेंट और आईआईटी कानपुर के तकनीकी सलाहकारों की समिति गठित की जाएगी। इस सलाहकार समिति के सदस्य बीएचयू के लिए असि नदी के उद्धार से जुड़े पहलुओं पर मार्गदर्शन का काम करेंगे।


अब तक के अध्ययन के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया है कि अगर काशी में असि नदी को उद्गम से लेकर संगम तक पुनर्जीवित कर लिया गया तो गंगा की धारा भी निर्मल हो जाएगी। इसलिए पहले असि नदी को पुनर्जीवित करने के लिए देश के टेक्नोक्रेट और पर्यावरणविद केंद्रित हो रहे हैं। बीएचयू के वीसी लॉज में कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में इसके लिए हाल में ही चुनिंदा विशेषज्ञों के साथ काशी के प्रबुद्ध लोगों से भी सुझाव लिए जा चुके हैं। जल्द ही असि नदी पर काम शुरू होने के संकेत मिले हैं।
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