गिरजाघर के सेक्रेटरी विजय दयाल बताते हैं कि ब्रिटिश पादरी एलवर्ट फैंटीमैन ने इस खूबसूरत चर्च की बुनियाद 1879 में रखी। उस समय ये पूरा इलाका सेना की छावनी में तब्दील था। ब्रिटिश सेना में ज्यादातर प्रोटेस्टेंट मसीही समुदाय के ही लोग थे। यहां चर्च बनाकर आराधना के लिए ही ब्रिटेन से पादरी एलवर्ट को अंग्रेज हुकुमत ने भेजा था। एलवर्ट के ही निर्देशन में लाल गिरजा बनकर तैयार हुआ।
इस गिरजा घर को स्थापित करने का एक प्रमुख कारण 1841 कटिंग मेमोरियल स्कूल की स्थापना थी। जिसमें पढ़ाने वाली ज्यादातर शिक्षिकाएं मिशनरी की थीं। जो चर्च बनने के बाद यहां प्रार्थना करने आती थीं। 1887 में ईश्वरी लाल इस चर्च के पहले भारतीय पादरी बनाए गए। चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया ने 1995 में सैम जोशुआ सिंह को गिरजा का 60वां पादरी बनाया। सचिव विजय दयाल का कहना है कि इस चर्च को मरम्मत की जरूरत है, लेकिन कैंटोमेंट बोर्ड से अनुमति नहीं मिल रही है।