कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर इंसानियत के लिए दुश्मन बनी तब्लीगी जमात का भदोही जिले से गहरा नाता रहा है। मखमली कालीनों के लिए दुनियाभर में मशहूर कालीन नगरी भदोही में जमातियों के स्वागत में काफी पहले से दबे पांव रेड कारपेट बिछती रही है। निजामुद्दीन मरकज में शामिल 11 बांग्लादेशियों समेत 14 लोगों के काजीपुर की एक मस्जिद के गेस्ट हाउस में 28 दिन तक छिपकर रहने के खुलासे के साथ रहस्यमयी प्याज के छिलके की सबसे बाहरी परत ही उधड़ पाई है।
यह पहला मामला नहीं है, जब बांग्लादेशी जमाती यहां आए हैं। इससे पहले भी कई बार विदेशियों का आवागमन हो चुका है। सूत्रों की मानें तो इनके धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़ी गतिविधियां काफी पहले से चलती रहीं हैं। यह बात अलग है कि खुफिया एजेंसियां इस मोर्चे पर मुकम्मल इनपुट जुटा पाने में विफल रहीं।
अंदरखाने से आईं खबरों पर गौर करें तो जिले में शिक्षा जगत, उद्योग और राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले कुछ लोग लखनऊ और दिल्ली के अपने सियासी कनेक्शनों के बूते इन्हें संरक्षण देते रहे हैं। तब्लीगी कमेटी के सदस्य के नाम पर आधा दर्जन से अधिक लोगों की पूरी जमात यहां है। इनमें फाउंडर मेंबर से लेकर अलग-अलग क्षेत्रों के लोग शामिल हैं।
इनमें कुछ लोग उनके फाइनेंसर के तौर काम करते रहे हैं तो कुछ ठहरने और खाने-पीने का प्रबंध करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। यहां एक बात और ध्यान देने वाली है कि काजीपुर के जिस इलाके से छिपे हुए जमाती पकड़े गए, वहीं से विगत दिनों सीएए के विरोध में जुलूस निकाला गया और भारी बवाल हुआ था। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक पुलिस और खुफिया एजेंसियां इन सारे बिंदुओं को खंगाल रही हैं।