काशी विद्यापीठ व अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि पहले इंग्लैंड व अमेरिका, भारत में भूख और कंगाली दिखाते थे। अब धारणा बदली है। अमेरिका कहता है कि हिंदुस्तानियों से बच कर रहना, कहीं वह हमारा रोजगार न छीन लें।
अंग्रेजों ने हिंदुस्तान को खूब लूटा, लेकिन वह हमारी संस्कृति नहीं लूट सके। हमारी संस्कृति आज भी जिंदा है और आगे भी जीवित रहेगी। हम पाश्चात्य संस्कृति को अपना रहे हैं, लेकिन अपनी संस्कृति बचाए हुए हैं। आधुनिकता के बावजूद हमने अध्यात्म को नहीं छोड़ा।
प्रदेश का बदला माहौल :
डॉ शर्मा ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को उल्टा प्रदेश कहा जाता था। वर्तमान में उत्तर प्रदेश का स्वरूप बदल रहा है। आज सूबे में औद्योगिकीकरण का माहौल बना है। उद्योगपति करीब 60 करोड़ रुपये सूबे में निवेश कर चुके हैं और इसका दायरा बढ़ता ही जा रहा है।
भारत के हाथ में पूरे विश्व की कुंडली :
मुख्य वक्ता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो राजेंद्र मिश्र ने कहा कि भारत के हाथों में पूरे विश्व की कुंडली है। भारत ने पूरी दुनिया को संभाला। उन्होंने कहा कि हमारी आर्य संस्कृति रही है। आर्य संस्कृति का अर्थ सिर्फ हिंदू नहीं, संपूर्ण विश्व है और हम अपना निर्माण अपनी मिट्टी से कर सकते हैं।
शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने की जरूरत :
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो टीएन सिंह ने कहा कि जो मूल को नहीं छोड़ता है, वह हमेशा जीवित रहता है। कोठारी आयोग का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने की जरूरत है। कोठारी समिति ने जीडीपी का छह फीसद शिक्षा पर खर्च करने की संस्तुति की थी, जबकि वर्तमान में जीडीपी का महज तीन फीसदी शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो जेपी सिंघल, संगठन मंत्री डॉ महेंद्र कपूर सहित अन्य लोगों ने भी विचार व्यक्त किए। स्वागत प्रो शैलेश कुमार मिश्र, संचालन डॉ प्रकाश उदय व धन्यवाद ज्ञापन प्रो आरपी सिंह ने किया।