वाराणसी। बीएचयू सिंहद्वार के सामने लंका चौराहे की यातायात व्यवस्था वसूली के खेल में ध्वस्त हो गई है। लंका पुलिस की शह पर यहां चौराहे से नरिया-सुंदरपुर, सामने घाट और कैंट जाने वाली सड़क के आधे हिस्से पर ऑटो वाले कब्जा जमाए रहते हैं। ऑटो के लिए बना गैंग-वे पूरी तरह से पटरी दूकानदारों के कब्जे में है।
सड़क किनारे वाहनों की पार्किगिं और अतिक्रमण से हालात इतने बदतर कि जाम से पार पाने का कोई रास्ता नजर नहीं आता। अब चाहे छात्रों की परीक्षाएं छूटें या अस्पताल आने वाला मरीज जाम में फंस कर कराहता रहे, किसी को कोई फिक्र नहीं। काशी को क्योटो बनाने का सपना दिखाने वाले हुक्मरानों और नेताओं को इस समस्या की ओर ध्यान देने तक की फुरसत नहीं है।
क्षेत्रफल और ट्रैफिक के दृष्टिकोण से शहर के बड़े चौराहों में से एक लंका पर बेतरतीब तरीके से ऑटो की पार्किगिं रोकने के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण ने गैंगवे बनवाया है। बीएचयू की चहारदीवारी से सटकर लंका से सुंदरपुर और सामनेघाट मार्ग पर यह गैंगवे बने हैं। ऑटो चालकों को इसी गैंगवे की हद में रहकर सवारियां भरनी थीं। ऐसा होने पर कहीं जाम नहीं लगता और आवागमन सुगम होता।
मगर यह उद्देश्य पूरा न हो सका। बीएचयू-सुंदरपुर मार्ग पर गैंगवे के भीतर गुमटियां चल रही हैं और ऑटो सड़क घेर कर खड़े रहते हैं। सड़क की दूसरी पटरी के गैंगवे के भीतर दवा की दुकानों में आने वालों की बाइक पार्क होती है और इसके बाहर जो जगह बचती है, उस पर ऑटो वाले कब्जा जमाए रहते हैं। इसके चलते दिन भर लंका चौराहे पर जाम लगा रहता है।
जानकारों का कहना है कि इसके बदले रोजाना अच्छी खासी रकम लंका थाना पुलिस ऑटो चालकों से वसूलती है। जब कोई अधिकारी या नेता आते हैं तो सभी ऑटोवालों को तितर-बितर कर दिया जाता है, मगर कुछ देर बाद फिर वही पुरानी स्थिति बहाल हो जाती है।