श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए सर्वे की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी। सर्वे में दिल्ली आईआईटी के साथ ही पुरातत्वविद, इतिहासकार, भूगोलविद और वास्तु विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
मंदिर विस्तारीकरण योजना के दायरे में आने वाले चौक से मणिकर्णिका घाट तक के सभी भवनों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा। कॉरिडोर के पहले चरण में मंदिर प्रशासन की ओर से 166 भवनों का सर्वे कराया गया था। इस बार 300 भवन इसके दायरे में होंगे।
सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर विकसित होने वाले श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए दोबारा सर्वे कराने की तैयारी है। साढ़े छह सौ करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए अब तक शासन से 190 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। सौ से अधिक भवनों की रजिस्ट्री अभी तक हो चुकी है। तीन सौ भवनों के ड्रोन सर्वे और भौतिक सत्यापन के बाद योजना के लेआउट पर काम शुरू होगा।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि कॉरिडोर के निर्माण और मंदिर विस्तारीकरण का दायरा बढ़ने के कारण तीन सौ भवनों का सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे के आधार पर ही आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।