ऐसे हो रही तैयारी
सीर गोवर्धन में सत्संग के लिए जर्मन हैंगर टेंट लगेंगे। एक फरवरी को रविदास जयंती पर दो लाख से अधिक अनुयायी दर्शन करने पहुंचेंगे। 500 से अधिक प्रवासी भारतीय (एनआरआई) भी मत्था टेकेंगे। वहीं, रैदासियों के गुरु संत निरंजन दास 30 जनवरी को काशी पहुंचेंगे।
रविदास जयंती पर उनका जन्मस्थान सीर गोवर्धन सजने-संवरने लगा है। एक सप्ताह पहले से ही सेवादारों का जत्था काशी पहुंच चुका है। अनुयायियों के रहने-खाने और ठहरने के लिए 80 से ज्यादा तंबू लग रहे हैं। संत रविदास मंदिर से लेकर सीर गोवर्धन का पूरा इलाका मेले में तब्दील होने लगा है।
श्रीगुरु रविदास जन्म स्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी केएल सरोवा ने बताया कि मैदान में सत्संग के लिए सभा स्थल पर जर्मन हैंगर बन रहा है। मैदान के सामने ही 80 से ज्यादा टेंट बनाए जा रहे हैं। विभिन्न राज्यों के अनुयायियों के ठहरने के लिए अलग-अलग टेंट और लंगर बन रहे हैं।
60 फीट चौड़ा और 120 फीट लंबा सत्संग पंडाल बन रहा है। सत्संग पंडाल के भीतर मंच बनेगा, जिस पर संत निरंजनदास का प्रवचन होगा। अस्थायी पुलिस चौकी, हेल्थ कैंप बन चुका है, जो 27 जनवरी से शुरू हो जाएगा। मंदिर से लौटूवीर मार्ग पर मरम्मत कार्य शुरू है। लंगर हाल में जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि 90 फीसदी कार्य हो चुके हैं। इस बार वातानुकूलित 60 कमरे भी तैयार किए जा रहे हैं। पंजाब, हिमाचल प्रदेश वे हरियाणा से सेवादार और संगत के आने लगी है।