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Ravidas Jayanti: अनूप जलोटा रैदास पदों से बहाएंगे भजनों की अमृतधारा, कल से महोत्सव; तैयारियां पूर्ण

Thu, 29 Jan 2026 06:33 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: संत रविदास की बंदगी के लिए एक बार फिर सीरगोवर्धन का इलाका बेगमपुरा में आकार लेने लगा है। गुरु चरण की रज माथे लगाने और अरदास के लिए रैदासी जुटने लगे हैं। उनके भजन-कीर्तन स्थल, ठहरने आदि की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 
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संत रविदास की बंदगी के लिए सीर में चल रही तैयारी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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संत रविदास जयंती में शामिल होने के लिए देश-विदेश अनुयायियों का रेला उमड़ने लगा है। सीर गोवर्धन मिनी पंजाब में तब्दील होने लगा है। नगवां स्थित संत रविदास पार्क में दो दिवसीय सांस्कृतिक अनुष्ठान होंगे। इसी क्रम में 30 व 31 जनवरी को गायन, वादन और नृत्य की धारा प्रवाहित होगी। अनूप जलोटा जैसे नामचीन कलाकार संत रविदास की महिमा का गान करेंगे। 20 प्रस्तुतियों में 50 से अधिक कलाकारों सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी।

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उपशास्त्रीय गायिका डॉ. सोमा घोष, कार्यक्रम संयोजक शुभंकर डे, आयोजन समिति के सदस्य अजय गुप्ता व अंकिता खत्री ने बुधवार को भेलूपुर स्थित एक होटल में पत्रकारों को बताया कि संत रविदास महोत्सव ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ थीम पर आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन सुबह आठ बजे से रात 9:30 बजे विभिन्न सत्रों में महोत्सव की आभा निखरेगी। शुरुआत पं. दुर्गाप्रसाद प्रसन्ना के शहनाई वादन से होगी। 

पं. देवाशीष डे का शास्त्रीय गायन, उमेश भाटिया के निर्देशन में संत रविदास की जीवनी पर आधारित नाट्य मंचन, शिल्पायन के विद्यार्थियों का भजन, डॉ. मंजरी पांडेय के संयोजन में कवि सम्मेलन होगा।
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लोक कलाकारों का दल धोबिया नृत्य की प्रस्तुति देगा। समापन पर 31 जनवरी को रात में 8:30 बजे से अनूप जलोटा के भजनों की अमृतधारा बहेगी। अंशुमान महाराज और मितेश मिश्रा के सरोद और सितार की जुगलबंदी, पं. गणेश प्रसाद मिश्र का गायन, मिर्जापुर के लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी।

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ऐसे हो रही तैयारी
सीर गोवर्धन में सत्संग के लिए जर्मन हैंगर टेंट लगेंगे। एक फरवरी को रविदास जयंती पर दो लाख से अधिक अनुयायी दर्शन करने पहुंचेंगे। 500 से अधिक प्रवासी भारतीय (एनआरआई) भी मत्था टेकेंगे। वहीं, रैदासियों के गुरु संत निरंजन दास 30 जनवरी को काशी पहुंचेंगे।

रविदास जयंती पर उनका जन्मस्थान सीर गोवर्धन सजने-संवरने लगा है। एक सप्ताह पहले से ही सेवादारों का जत्था काशी पहुंच चुका है। अनुयायियों के रहने-खाने और ठहरने के लिए 80 से ज्यादा तंबू लग रहे हैं। संत रविदास मंदिर से लेकर सीर गोवर्धन का पूरा इलाका मेले में तब्दील होने लगा है। 

श्रीगुरु रविदास जन्म स्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी केएल सरोवा ने बताया कि मैदान में सत्संग के लिए सभा स्थल पर जर्मन हैंगर बन रहा है। मैदान के सामने ही 80 से ज्यादा टेंट बनाए जा रहे हैं। विभिन्न राज्यों के अनुयायियों के ठहरने के लिए अलग-अलग टेंट और लंगर बन रहे हैं। 

60 फीट चौड़ा और 120 फीट लंबा सत्संग पंडाल बन रहा है। सत्संग पंडाल के भीतर मंच बनेगा, जिस पर संत निरंजनदास का प्रवचन होगा। अस्थायी पुलिस चौकी, हेल्थ कैंप बन चुका है, जो 27 जनवरी से शुरू हो जाएगा। मंदिर से लौटूवीर मार्ग पर मरम्मत कार्य शुरू है। लंगर हाल में जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि 90 फीसदी कार्य हो चुके हैं। इस बार वातानुकूलित 60 कमरे भी तैयार किए जा रहे हैं। पंजाब, हिमाचल प्रदेश वे हरियाणा से सेवादार और संगत के आने लगी है। 
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