वनाधिकार आंदोलन को कमजोर करने साजिश है नेताओं पर कार्रवाई: दीपांकर
लालगंज के तेंदुई खुर्द में नेताओं की गिरफ़्तारी किसी कानून के उल्लंघन के कारण नहीं, बल्कि वनाधिकार आंदोलन को कमज़ोर करने के उद्देश्य से की गई थीं। यह बातें भाकपा (माले) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बुधवार को सिटी क्लब में पत्रकार वार्ता में कही।
भाकपा (माले) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव कहा, हमारे नेताओं को इसलिए गिरफ़्तार नहीं किया गया क्योंकि उन्होंने कोई ग़लत काम किया, बल्कि इसलिए किया गया क्योंकि वे उन आदिवासी समुदायों की आवाज़ बनकर खड़े हैं, जिन्हें संसद द्वारा बनाए गए वनाधिकार क़ानून के तहत अधिकार प्राप्त हैं।
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि हाल के वर्षों में श्रम क़ानूनों और ग्रामीण रोज़गार से जुड़े ढाँचों में किए गए बदलाव एक ही दिशा की ओर संकेत करते हैं, जहां सामूहिक अधिकारों को कमज़ोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड काल में बड़े पैमाने पर हुए पलायन के दौरान मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों को सहारा दिया था और ज़रूरत इस क़ानून को मज़बूत करने की थी, न कि उसे कमज़ोर करने की।
राष्ट्रीय महासचिव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के ज़रिए मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में लोगों के नाम काटे जाने पर भी चिंता व्यक्त की। कहा कि सत्यापन के नाम पर ग़रीब और हाशिए पर खड़े नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को सांप्रदायिक रंग देकर ख़तरनाक माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से बंगाली भाषी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।