शासन की नई गाइडलाइन के अनुसार अनाज वितरण की ऑनलाइन मानीटरिंग की जानी है। इसके तहत हर कोटे की दूकानों का सत्यापन कराया जाएगा कि उनके यहां कितने उपभोक्ता अनाज उठा रहे हैं। उन सबका डाटा आधार से लिंक किया जाएगा। इसके बाद कोटेदारों की मनमानी भी बंद हो जाएगी। दो रुपये किलो गेहूं को पांच रुपये और तीन रुपये चावल को सात रुपये में चोरी छिपे बेचने वाले कोटेदारों की कालाबाजारी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी।
जिला आपूर्ति अधिकारी अशोक यादव ने बताया कि पात्र और अपात्रों की सूची नए सिरे से तैयार कराई जाएगी। सर्वे का काम पूरा होने के बाद पात्र रहेंगे और अपात्र छंट जाएंगे। इसी के साथ राशन की दूकानों को भी हाईटेक किया जाना है। यहां भी थंब इंप्रेशन के बाद ही अनाज का वितरण होगा। जिस कार्डधारक का थंब इंप्रेशन नहीं होगा उसके हिस्से का अनाज कोटेदार नहीं बेच पाएंगे।
हाल ही में लखनऊ में हुई शासन की बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ किया था कि हर गरीब को अनाज देना उनकी प्राथमिकता है। कोटे की दूकानों को ऑनलाइन मानीटरिंग सिस्टम से जोड़ा जाना है। यह सब कुछ होने में अभी समय लगेगा। फिलहाल पात्र गृहस्थी कार्डधारकों की सूची की जांच शुरू करा दी गई है।