30 जून तक रहेगा रूट डायवर्जन।
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आज रथयात्रा चौराहे पर पहुंचेगा रथ
रथयात्रा मेला 27 से शुरू होगा। मगर, 162 साल पुराना रथ गुरुवार को सिगरा रथशाला से सुसज्जित होकर रथयात्रा-महमूरगंज मार्ग के पास खड़ा हो जाएगा। 27 को भोर में भगवान जगन्नाथ रथारूढ़ हो जाएंगे। भगवान जगन्नाथ की डोली यात्रा जगन्नाथ मंदिर से शाम को निकलेगी।
डोली यात्रा मंदिर से निकलकर अस्सी चौराहा, पद्मश्री चौराहा, दुर्गाकुंड होते हुए नबाबगंज, पंचायती चौतरा, राम मंदिर, खोजवा पुस्तकालय, खोजवां बाजार, द्वारिकाधीष मंदिर पहुंचेगी, जहां पर महंत आरती करेंगे। फिर यात्रा विनायका, बैजनत्था मंदिर होते हुए रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग पहुंचेगी।
वाराणसी में रथयात्रा मेले की तैयारियां पूर्ण।
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भजन कीर्तन, प्रवचन के साथ शुरू हुआ जगन्नाथ महोत्सव
इस्कॉन मंदिर दुर्गाकुंड में बुधवार को तीन दिवसीय जगन्नाथ महोत्सव शुरू हुआ। भक्तों की टोली ने भजन कीर्तन, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। मंदिर के अध्यक्ष अच्युत मोहन दास और बसुश्रेष्ठ प्रभु ने प्रवचन में कहा कि कलयुग में भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से सभी पाप कट जाते हैं। उनके दर्शन एक असाधारण आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं। जो आस्था के साथ रथ खींचते हैं, वह पुनर्जन्म के चक्र से पार हो जाते हैं।
श्रद्धालुओं ने हरेकृष्ण महामंत्र हरिनाम संकीर्तन किया। प्रसाद का वितरण हुआ। इस मौके पर साक्षी मुरारी, रसिक गोविंद, मुरारी गुप्त दास, राम केशव आदि रहे। बृहस्पतिवार को दोपहर तीन बजे इस्कॉन मंदिर से अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर तक शोभायात्रा निकाली जाएगी।
इस्कॉन मंदिर दुर्गाकुंड में बुधवार को तीन दिवसीय जगन्नाथ महोत्सव शुरू हुआ। भक्तों की टोली ने भजन कीर्तन, प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों पेश किया। मंदिर के अध्यक्ष अच्युत मोहन दास एवं बसुश्रेष्ठ प्रभु ने प्रवचन में कहा कि कलयुग में भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से सभी पाप कट जाते हैं।
उनका दर्शन एक असाधारण आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं। जो आस्था के साथ रथ खींचते हैं, वह पुनर्जन्म के चक्र से पार हो जाते हैं। श्रद्धालुओं ने हरेकृष्ण महामंत्र हरिनाम संकीर्तन किया। प्रसाद का वितरण हुआ। इस मौके पर साक्षी मुरारी, रसिक गोविंद, मुरारी गुप्त दास, राम केशव आदि रहे। गुरुवार को दोपहर तीन बजे इस्कॉन मंदिर से अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर तक शोभायात्रा निकाली जाएगी।