सात वार नौ त्योहार की काशी के त्योहार भी अनोखे हैं। त्योहारों की शृंखला रथयात्रा से आरंभ हो जाती है और नाथों के नाथ भगवान जगन्नाथ मनफेर के लिए काशी की गलियों में निकलते हैं। कोरोना संक्रमण के दो साल बाद रथयात्रा का मेला फिर से सजेगा और भक्तवत्सल भगवान भइया बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे।
बनारस में तीन दिन तक की भगवान की यह यात्रा रथयात्रा काशी के लक्खा मेले में शुमार है। अक्षय तृतीया को रथ के पूजन के साथ रथयात्रा के अनुष्ठान आरंभ हो चुके हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भक्त अपने भगवान को गर्मी की तपिश से राहत दिलाने के लिए गंगाजल से स्नान कराएंगे। भक्तों के प्रेम में स्नान करने के बाद भगवान बीमार होंगे और पखवारे भर विश्राम करेंगे।
इस अवधि में भगवान को काढ़े का भोग लगाया जाएगा। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 30 जून को भगवान स्वस्थ होंगे और मनफेर के लिए काशी की गलियों में भ्रमण पर निकलेंगे। एक जुलाई को रथयात्रा मेला भी शुरू हो जाएगा। मेले के संयोजक ट्रस्टी आलोक शापुरी ने बताया कि रथयात्रा मेले का आयोजन 218 साल से अनवरत किया जा रहा है, केवल कोरोना संक्रमण काल में दो साल तक भगवान यात्रा पर नहीं निकले। सारी परंपराएं मंदिर में ही निभाई गईं। इस बार मेले के आयोजन की तैयारियां चल रही हैं। 14 जून को भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ेंगे और 30 जून को भगवान काशी भ्रमण पर निकलेंगे।