अप्रैल महीने की शुरुआत में ही तेजी से पांव पसार चुके कोरोना वायरस का असर रहा कि अप्रैल में ही 41250 नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई, जबकि 176 की मौत हुई। अब संक्रमण पर रोक लगनी शुरू हो गई है। कोरोना से संक्रमितों की संख्या रोजाना जहां घट रही है, वही ठीक होने वाले लोगों की संख्या में भी रोजाना बढ़ोतरी हो रहा है। संक्रमण की रफ्तार अप्रैल में रफ्तार पकड़ी और माह के मध्य में इसकी रफ्तार 25 से 30 फीसदी हो गई थी, जो अप्रैल के अंतिम सप्ताह में घटकर 15 से 20 फ़ीसदी तथा मई माह के शुरुआती सप्ताह में इससे भी नीचे जा रहा है। बृहस्पतिवार को कोरोना संक्रमण की दर 8.21 फीसदी पर पहुंच गई है।
इस महीने मिलने वाले मरीज
06 मई 876
5 मई 806
04 मई 1328
03 मई 992
02 मई 1294
01 मई 1765
बीएचयू के एंपीथियेटर में एक हजार बेड का डीआरडीओ की ओर से बनाया जा रहा अस्थायी अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
आंशिक कर्फ्यू, सख्ती भी संक्रमण कम होने की वजह
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा आंशिक कर्फ्यू का पहले से अब सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इसको भी संक्रमण की दर घटने की एक मुख्य वजह मानी जा रही है। सामान्य दिनों में बाजारों के खुलने और लोगों की आवाजाही और भीड़ होने के साथ ही मास्क का प्रयोग भी कम ही कर रहे थे। कई जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग भी भूल गए थे। अब जिला प्रशासन और पुलिस की सख्ती की वजह से अब अधिकांश लोग जहां सड़कों पर कम निकल रहे हैं, वही मास्क का प्रयोग करने वालों की संख्या बढ़ी है।
अस्पतालों में बेड की मारामारी भी नहीं
जिले के कोविड अस्पतालों में जहां पहले बेड को लेकर मारामारी जैसी नौबत थी वहीं अब इस तरह की स्थिति भी इस तरह का संकट भी कम हो गया है। इधर मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में ही जहां कोविड संदिग्ध मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। इमरजेंसी में 30 से अधिक बेड खाली हैं, जबकि अन्य कोविड अस्पतालों के बाहर भी पहले जैसी मरीजों की अब भीड़ नहीं दिख रही है। इस बीच बीएचयू में बन रहे अस्थायी अस्पताल के शुरू होने के बाद भी मरीजों को बड़ी राहत होगी।
लोगों की जागरूकता और व्यवस्था में सुधार की वजह से कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमी है। लोग मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कोरोना प्रोटोकाल का पालन करें। लक्षण दिखते ही दवाओं का सेवन शुरू कर दें। कोरोना को हराने में सबका सहयोग जरूरी है। - दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त