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सीमा पर तैनात जवानों के लिए भेजा गया रक्षा सूत्र

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वाराणसी। परमात्मा का स्वरूप वही होता है जो अपने राष्ट्र और राष्ट्रवासियों की रक्षा करते हैं। हमारी सेना के जवान और चिकित्सक अपरोक्ष रूप से परमात्मा के स्वरूप हैं। उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने व्यक्त किए। वह बुधवार को पाणिनी भवन सभागार में आयोजित सेना के जवानों के लिए रक्षा पर्व महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ के उपरांत सेना के अधिकारियों को रक्षा सूत्र सौंपा गया। यह रक्षा सूत्र सीमा पर तैनात जवानों को रक्षा बंधन से पहले भेजे जाएंगे।
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मुख्य अतिथि ले. कर्नल विकास चौहान ने कहा कि रक्षा पर्व के जरिए बहनें राखी भाईयों की कलाई पर बांधती हैं और वह आशीर्वाद के रूप में हम सभी के लिए रक्षा कवच की तरह हैं। विशिष्ट अतिथि कर्नल आरएस ठाकुर ने कहा कि हम लोगों की सुदूर पोस्टिंग होने से डाक के माध्यम से आज तक परिवार की राखी ठीक समय पर नहीं मिली, लेकिन आप जैसी बहनों के समूह के द्वारा प्रेषित रक्षा-सूत्र सदैव हम सभी को समय से प्राप्त होता है। कर्नल आरएस ठाकुर ने कहा कि आज जो राखी हमें सौंपी जा रही है यह एक धागा नहीं बल्कि हम सभी सेना के जवानों के लिए आप सभी का स्नेह, आशीर्वाद और शुभकामनाएं हैं। प्रो. गंगाधर पंडा ने कहा कि रक्षा बंधन के दिन गुरु अपने यजमान को धागा बांधकर मंत्रों के माध्यम से उनके जीवन की रक्षा के लिए आशीर्वाद देते हैं। समारोह की संयोजिका डॉ. विद्या चन्द्रा तथा संचालन डॉ. विशाखा शुक्ला ने किया। इस दौरान प्रति कुलपति प्रो. हेतराम कछवाह, प्रो. सदानंद शुक्ल, प्रो. महेन्द्रनाथ पाण्डेय, प्रो. हरप्रसाद दीक्षित, प्रो. शशिरानी मिश्रा, जनसर्म्पक अधिकारी शशीन्द्र मिश्र आदि मौजूद रहे।
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