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रामनगर की रामलीला: युद्ध टलने की उम्मीद खत्म, अंगद ने रावण को ललकारा; समुद्र पार करने की लीला ने मोहा

Fri, 16 Oct 2026 03:27 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में प्रभु श्रीराम के समुद्र पार करने की लीला देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इसके बाद युद्ध टलने की उम्मीद खत्म होने पर अंगद ने रावण को ललकारा। लीला के मंचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कलाकारों के सजीव अभिनय और संवादों ने दर्शकों को रामकथा के प्रसंगों से जोड़े रखा।
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रामनगर की रामलीला का मंचन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अहंकार मनुष्य के विनाश का कारण बनता है। रावण भी इसके वशीभूत हो गया था। प्रभु श्रीराम से बैर न लेने की सबकी सलाह उसे नागवार गुजर रही थी। रामजी की वानरी सेना कहने को वानरों की थी, लेकिन इसमें एक से बढ़कर एक शूरवीर थे। हनुमान इसकी बानगी दिखा ही चुके थे। जब अंगद की बारी आई तो उन्होंने रावण के हर छोटे-बड़े शूरवीर को लज्जित करने के साथ ही उसका भी मानमर्दन कर दिया। इसके साथ ही युद्ध टलने की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई।

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रामलीला के इक्कीसवें दिन बृहस्पतिवार को अंगद विस्तार की लीला हुई। समुद्र पार कर राम की सेना लंका में प्रवेश करती है। जामवंत की सलाह पर युद्ध टालने के लिए राम ने अंगद को दूत बनाकर रावण को समझाने के लिए भेजा। 

उधर, रावण का दूत उसे बताता है कि राम सेना सहित लंका में प्रवेश कर गए हैं। वह राम की सेना का वर्णन करता है। यह सुनकर रावण अपने मंत्रियों से विचार-विमर्श करता है। उसके मंत्री उसे न डरने की सलाह देते हुए कहते हैं कि वानर और भालू तो उनके आहार हैं। राम अपनी सेना के साथ सुवेलगिरि पर्वत पर डेरा डालकर विभीषण से विचार-विमर्श करते हैं।
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रावण अपने विचित्र महल में बैठकर नाच-गाना सुनता है। उसी समय राम एक बाण चलाते हैं, जिससे रावण का छत्र, मुकुट और कर्णफूल गिर जाते हैं। यह देखकर उसकी सभा में भय छा जाता है। रावण सभी से शयन करने के लिए कहकर अपने महल में चला जाता है। 

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