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Ramnagar Fort: महाभारत काल से जुड़ा है काशी का ये किला, लुभाते हैं पुराने जमाने की कारें व तोपों के कलेक्शन

Tue, 26 Dec 2023 03:33 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

किले में संग्रहालय और राजपरिवार का आवास है। इसके अलावा म्यूजियम में शेर, भालू और मगरमच्छ की खाल महाराजाओं की वीरता की मिसाल के रूप में संग्रहित है। 
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पुराने जमाने की कार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रामनगर किले का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। किले में कई तरह की पालकी, औजार, प्राचीन वस्तुओं और विदेशी कारों का कलेक्शन पर्यटकों को लुभाता है। वेद व्यास का मंदिर होने के कारण इस स्थान को महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है। 

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बलुआ पत्थर की संरचना वाला यह किला 1750 में काशी नरेश राजा बलवंत सिंह ने मुगल शैली में निर्मित करवाया था। 18वीं शताब्दी से काशी नरेश यहां निवास कर रहे हैं। किले में संग्रहालय और राजपरिवार का आवास है। इसके अलावा म्यूजियम में शेर, भालू और मगरमच्छ की खाल महाराजाओं की वीरता की मिसाल के रूप में संग्रहित है। यही नहीं आसमान में उछालकर निशाना बनाए गए सिक्के भी निशानेबाजी कला के नमूने के रूप में म्यूजियम की शान बढ़ा रहे हैं। इनकी कलात्मकता पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

पुराने जमाने की कारें आकर्षण का केंद्र
विदेश से आईं कारें किले में आकर्षण का केंद्र हैं। 1970 में बेल्जियम से आई मिनरवा कार को शिक्षा की देवी का नाम दिया है। इसके पहिये में लोहे की तीलियां लगी हैं और रबर चढ़ाई गई है। इसमें हवा नहीं भरी जाती। हार्न और लाइट भी अद्भुत हैं।

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आठ आदमी चलाते थे कैनन मशीन गन

सहेजकर रखी गई हैं 14 पालकी - फोटो : अमर उजाला
यहां 10 से 12 फीट लंबी लाग बैरल गन है। कैनन मशीन गन चलाने के लिए आठ व्यक्तियों की जरूरत पड़ती थी। हाथियों को मारकर बेहोश करने के लिए एलिफाइट गन रखी गई है। एक अंगुली से भी छोटी इटालियन गन है। इसे रानियां अपनी सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करतीं थीं।

नौ तोप का कलेक्शन
किले में आज भी नौ तोप हैं। मुख्य दरवाजे के दोनों ओर एक-एक तोप और सात तोप किले के अंदर हैं। आज भी काम करती हैं। रामलीला में धनुष यज्ञ के दौरान इनका इस्तेमाल किया जाता है।

सहेजकर रखी गई हैं 14 पालकी
किले में 14 पालकी रखी गईं हैं। नालकी पालकी से भगवान राम फुलवारी में जाते थे। चौवंशी पालकी का उपयोग रामायण में तब किया गया है जब सीता जनकपुर में राम से विवाह कर अयोध्या पहुंचीं। राजाओं ने अपने समय में गर्मी से बचाव के लिए घास से बनी खास पालकी का निर्माण करवाया था। सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र तोड़दार पालकी है। इस पालकी पर मेवाड़ के चित्रकारों ने कलाकृति उकेरी थी।
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