राजा दशरथ पुत्रेष्ठि यज्ञ करते हैं। रानियों को पुत्रों की प्राप्ति होती है। श्री राम उनसे कहते हैं कि तुम दोनों ने बहुत तपस्या की है तुमने हमसे पुत्र मांगा सो उसे सत्य करने तुम्हारे घर में प्रकट हुए हैं। तब कौशल्या उनसे यह रूप छोड़ बाललीला करने को कहती हैं। इतना कहते ही श्रीराम बालरूप धारण कर रोने लगते हैं।
सारी अयोध्या में खुशी छा जाती है। राजा दशरथ ब्राह्मणों को दान देते हैं। अयोध्या दीपों से जगमग हो उठती है। सोहर और मंगलगीत गाए जाते हैं। राजा दशरथ के आग्रह पर गुरु वशिष्ठ चारों पुत्रों का नामकरण करते हैं। इसके बाद बाल रूपी श्रीराम द्वारा मृगया लीला संपन्न होती है। रामलीला को आरती कर विराम दिया जाता है।
कौशल्या जायो लल्ला, अवध में मचो हल्ला...
जाल्हूपुर की रामलीला में सोमवार को श्रीराम जन्म की लीला हुई। जन्म के बाद सूप में रखकर जैसे ही रामजन्म के लीला का मंचन किया गया, महिलाएं सोहर गाने लगीं। रामजन्म के समाचार से राजा दशरथ सहित संपूर्ण अयोध्या में खुशी छा जाती है। अवध में चारों ओर बधाई गीत गाए जाने लगे।
कौशल्या जायो लल्ला, अवध में मचो हल्ला, अवध में जन्मे रघुराई, कौशल्या रानी दे दो बधाई। बाल स्वरूप भगवान राम से मिलने भगवान शंकर योगी का भेष बनाकर आते हैं और इसके बाद चारों भाइयों का नामकरण गुरु वशिष्ठ करते हैं। इसके बाद भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा दीक्षा के प्रस्थान करते हैं।
शिवपुर रामलीला में चारों भाइयों का हुआ नामकरण
शिवपुर रामलीला में सोमवार को भगवान श्रीराम के जन्म की लीला हुई। रामजन्म की लीला में श्रीराम के जन्म के साथ ही अयोध्या में हर्ष और उल्लास का वातावरण छा गया। लीला के अगले चरण में कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ ने प्रभु श्रीराम, भरत, लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न का नामकरण संस्कार संपन्न कराया।