गाजीपुर के अशरफ शत्रुघ्न और माता अनसूया की भूमिका निभा रहे हैं। श्रीराम के छोटे भाई का किरदार निभाकर उनका जीवन परिवर्तित हो चुका है। भदोही के प्रदीप कुमार मां सीता का किरदार निभा रहे हैं। सोनभद्र के चिंतामणि चौबे रावण और दशरथ का किरदार निभा रहे हैं। वह हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। भारी-भरकम व्यक्तित्व और आवाज के कारण वह रावण के किरदार में जान फूंक देते हैं। गोरखपुर के रंजीत यादव हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं।
महीनों की साधना से बदला कैदियों का स्वभाव
वरिष्ठ जेल अधीक्षक राधा कृष्ण मिश्रा बताते हैं कि इस वर्ष रामलीला में अभिनय करने वाले लगभग 80 प्रतिशत बंदी पहली बार मंच पर उतर रहे हैं। इन पात्रों की तैयारी बीते ढाई से तीन महीनों से चल रही है। संवाद अदायगी, चौपाइयों के उच्चारण और सात्विक दिनचर्या के कारण बंदियों के आचार-विचार, बोलचाल और आपसी व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखा गया है। जो कैदी पहले अवसाद या गुस्से में रहते थे, वे अब विनम्रता से पेश आ रहे हैं। इस बदलाव के कारण बैरकों में अन्य कैदियों के बीच भी इनके प्रति सम्मान बढ़ गया है।