मंदिर की परिकल्पना जगतगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी की है। वे चाहते हैं कि निर्माण कार्य होने तक रामलला इस काठ के मंदिर में रहें, ताकि भक्तों को दर्शन सुलभ हो सकें। इस दौरान रमेश उपाध्याय ने एक ग्राम और महंत मुनीशरण ने 21 सौ रुपये का सोना दान किया।