डीएम ने कहा कि आजमगढ़ साहित्य सरजना की धरा है। यह प्रवाह विविध प्रयोगों के जरिये नयी पीढ़ी में प्रवाहित होता रहेगा। हरियाणा ओलंपिक संघ के जगबीर मलिक ने कहा कि पूर्वांचल साहित्यकारों की धरा है। साहित्य अकादमी के संयोजक एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. चितरंजन मिश्र ने कहा कि खड़ी हिंदी का सबसे बड़ा महाकाब्य आजमगढ़ के ही निजामाबाद में रचा गया।
आजमगढ़ 1857 से लेकर वर्तमान समय तक लोक के स्वर को स्थापित करके जीने वाला शहर है। डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि यह पुस्तक संस्कृति के चुनौती का शहर है। ऐसे आयोजन पुस्तक संस्कृति के उन्नयन के वाहक हैं।
हवलदार यादव ने कहा कि आजमगढ़ पुस्तक मेला सभी विचारधाराओं और धर्मों का संगम है। विधायक आलमबदी, डायट प्राचार्य डा. अमरनाथ राय, शिब्ली कालेज के प्राचार्य मसूद अख्तर ने विचार रखे। लेखक कन्हैया लाल यादव, डा. रविन्द्र नाथ राय, भावना मिश्रा, अनिल राय ने भी विचार रखे। संचालन राजीव रंजन ने किया।
संरक्षित सड़क पर विमर्श आज
28 जनवरी को सुरक्षित सड़क हमारा अधिकार विषय पर शिब्ली डिग्री कालेज के सभागार में विमर्श होगा। समकालीन भारतीय साहित्य के संपादक बृजेंद्र त्रिपाठी और एआरटीओ प्रशासन आरएन चौधरी मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करेंगे। सभी शिक्षण संस्थाओं में सक्रिय एनएसएस वालिंटियर भाग लेंगे। आयोजन में निशार बेग, आफाक अहमद, अफरोज आलम खां, नदीम अहमद ने सक्रिय भूमिका निभायी।