फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ramlila 2025: रामनगर की रामलीला में चौथी बार नहीं हुई रामजन्म की लीला, चंद्रग्रहण के चलते नहीं हुई लीला

Mon, 08 Sep 2025 08:46 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Chandra Grahan In Varanasi: चंद्रग्रहण के कारण रामनगर की रामलीला में दूसरे दिन लीला नहीं हुई। वहीं दूसरी बार दोपहर में क्षीरसागर की झांकी सजी। 
विज्ञापन
रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रामनगर की रामलीला के इतिहास में यह चौथा अवसर था जब ग्रहण के कारण रामजन्म की लीला का मंचन नहीं हुआ। चंद्रमा पर ग्रहण का संकट आया तो प्रभु श्रीराम कहां से अवतार लेते। चंद्रग्रहण और सूतक के कारण रामनगर की रामलीला में दूसरे दिन रामजन्म की लीला के स्थान पर लगातार दूसरे दिन दोपहर में क्षीरसागर की झांकी सजाई गई।

विज्ञापन


रविवार को रामनगर पोखरे ने क्षीरसागर का रूप लिया और वैकुंठ लोक में विराजे भगवान विष्णु और लक्ष्मी की आरती हुई। ढाई बजे होने वाली आरती देखने के लिए भारी संख्या में लीला प्रेमी जुटे। रविवार को रामलीला के दूसरे दिन श्रीराम जन्म की लीला होनी थी। लेकिन, ग्रहण के चलते सूतक लग जाने के चलते रामलीला संभव नहीं थी।

इसके चलते पहले से ही लीला स्थगित कर दी गई थी। चूंकि रामनगर की रामलीला की परंपराओं के अनुसार लीला विभिन्न वजहों से स्थगित होने पर आरती अवश्य कराई जाती है। उसी के अनुरूप रविवार को दोपहर में क्षीरसागर की झांकी और आरती की गई। अब सोमवार को श्रीराम जन्म की लीला होगी।
विज्ञापन


लीला प्रेमियों ने बताया कि श्रीरामलीला रामनगर के इतिहास में यह चौथी बार है कि रामजन्म की लीला के दिन ग्रहण लग जाने के कारण क्षीरसागर की झांकी दो दिन में कराई गई। भगवान के अवतार की लीला, ग्रहण के अगले दिन आश्विन कृष्ण प्रतिप्रदा यानी आठ सितंबर को संपन्न होगी। सामान्यतः श्री रामलीला रामनगर में भगवन आविर्भाव की लीला शुक्ल पक्ष में संपन्न होती है लेकिन इस साल कृष्ण पक्ष में होगी।

इसे भी पढ़ें; Varanasi News: मॉरीशस के पीएम का दौरा अब तीन दिन का, प्रधानमंत्री मोदी भी 11 सितंबर को आएंगे

विज्ञापन

किसी दिन भी आएं सब मंगल ही मंगल है

कुछ लोगों ने कहा, ला भइया! भगवन के जन्म पर ही ग्रहण, सब मंगल रही न? कुछ लीला प्रेमियों ने कहा कि श्रीराम जी कृष्ण पक्ष में आएं या शुक्ल पक्ष में वो तो उनकी लीला है, वही जाने। किसी रूप में किसी दिन भी आएं सब मंगल ही मंगल है। ग्रह नक्षत्र उनके अनुकूल रहते हैं वो ग्रहों के अनुकूल नहीं चलते। उनके विवाह के समय भी कहां ग्रह ठीक था लेकिन धनुष टूटते ही सूर्य भगवान ने अपने घोड़ों की दिशा बदल दी। हम अपनी शास्त्र परंपरा के अनुसार चलने वाले हैं और भगवन भी यही आदेश करते हैं परंतु सच मानिए उनके लिए क्या ग्रह नक्षत्र अनुकूल या प्रतिकूल। ऐसे भी हम प्रेमियों के लिए तो मंगल ही मंगल है। ग्रहण के कारण भगवन झांकी का आनंद रात्रि और दिन दोनों में ही अनुभव करने को मिला। प्रभु तो हम लोगों पर प्रसन्न होकर दो बार दर्शन देने आएं हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें