कुछ लोगों ने कहा, ला भइया! भगवन के जन्म पर ही ग्रहण, सब मंगल रही न? कुछ लीला प्रेमियों ने कहा कि श्रीराम जी कृष्ण पक्ष में आएं या शुक्ल पक्ष में वो तो उनकी लीला है, वही जाने। किसी रूप में किसी दिन भी आएं सब मंगल ही मंगल है। ग्रह नक्षत्र उनके अनुकूल रहते हैं वो ग्रहों के अनुकूल नहीं चलते। उनके विवाह के समय भी कहां ग्रह ठीक था लेकिन धनुष टूटते ही सूर्य भगवान ने अपने घोड़ों की दिशा बदल दी। हम अपनी शास्त्र परंपरा के अनुसार चलने वाले हैं और भगवन भी यही आदेश करते हैं परंतु सच मानिए उनके लिए क्या ग्रह नक्षत्र अनुकूल या प्रतिकूल। ऐसे भी हम प्रेमियों के लिए तो मंगल ही मंगल है। ग्रहण के कारण भगवन झांकी का आनंद रात्रि और दिन दोनों में ही अनुभव करने को मिला। प्रभु तो हम लोगों पर प्रसन्न होकर दो बार दर्शन देने आएं हैं।