रमजान के दूसरे अशरे की शुरुआत जुमे के साथ हो गई। मगफिरत का यह अशरा रमजान के 20वें रोजे के सूरज डूबने तक रहेगा। दूसरे अशरे में रोजेदार रोजा रखकर अल्लाह से मगफिरत की दुआ करेंगे। कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार रमजान के दूसरे जुमे की नमाज अदा की गई। मस्जिदों में सीमित संख्या में नमाजियों ने जुमे की नमाज अदा की। वहीं घरों पर भी रोजेदारों नमाज अदा कर खुदा से कोरोना के खात्मे की दुआ मांगी।
दूसरे अशरे में रोजेदार रोजा रखकर अल्लाह से मगफिरत की दुआ करते हैं। इस दौरान अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा की जाती है। कोरोना संक्रमण काल में पाबंदियों के साथ रोजे की तमाम रवायतें निभाई जा रही हैं। गाजी मियां रौजा के गद्दीनशीं हाजी एजाजुद्दीन हाशमी ने बताया कि रोजा इस्लाम का तीसरा अहम रुकन है। रमजान का महीना तमाम महीनों में सबसे अफजल है। यह रहमत और बरकत वाला महीना है। इस महीने में रहमतों और बरकतों का नुजूल होने लगता है।
रोजे का मकसद सिर्फ और सिर्फ यह है कि हमारे अंदर तकवा और परहेजगारी पैदा हो सके। यह महीना गम खारी का है। इसलिए हमें चाहिए कि अपने गरीब पड़ोसियों और रिश्तेदारों का जरूर ध्यान रखें। अपने आप को गुनाहों से बचा कर रखें ताकि रोजे का मकसद हासिल हो सके, क्योंकि यह महीना ऐसे वक्त में आया है जब हमारे मुल्क में कोरोना का संक्रमण है। इसलिए हमें चाहिए कि समाजिक दूरी बनाकर रखें और अपने अपने घरों में रहकर इबादत करें। इस दौरान अल्लाह से दुआ करें कि पूरी दुनिया से और अपने मुल्क से कोविड 19 जल्द खत्म हो जाए और मुल्क में अमन चैन अता फरमाएं।
बंदों पर खुलकर बरसती है खुदा की रहमत
हाजी ओकास अंसारी ने बताया कि रजमान उल मुबारक इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है। यह रहमतों वाला, बरकतों वाला महीना है जिसमें अल्लाह शैतान को कैद कर देता है, जिससे वह लोगों की इबादत में खलल न डाले। रमजान उल मुबारक में हर नेकी का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है। हर नवाफिल का सवाब सुन्नतों के बराबर और हर सुन्नत का सवाब फर्ज के बराबर कर दिया जाता है। इस तरह सभी फर्ज का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है। मतलब यह कि इस माहे मुबारक में अल्लाह की रहमत खुलकर अपने बंदों पर बरसती है।
नन्हे रोजेदार
मांग रहे कोरोना से खात्मे की दुआ
जमालुद्दीन पुरा का रहने वाले अजीमुश शान इन दिनों इस्लामी रंग में डूबे हैं। अल सहर सहरी करना, नमाज फजर अदा करना और कुरान की तिलावत करना अजीमुश शान का रोज का मामूल है। नन्हे रोजेदार ने बताया कि उसने रोजा मुकम्मल पूरा करने की ठानी है। मदरसा मतलउल उलूम में कक्षा छह का छात्र पिता मुमताज अली के लाख मना करने पर भी लगातार रोजा रख रहा है। रोजाना नन्हे हाथों से दुआ मांगते हुए ये नन्हा रोजेदार कहता है कि ऐ अल्लाह हमारे देश को, समूची दुनिया को कोरोना जैसी महामारी से छुटकारा दे दे और सभी प्रकार की मुसीबत से हमें निजात दे।